2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त करने का लक्ष्य, अमित शाह के पंजाब दौरे से गरमाई राजनीति; सात साल से चल रही तैयारी

0 24

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशे की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है और केंद्र से लेकर राज्यों व जिलों तक नशे की तस्करी के खिलाफ तंत्र विकसित किया गया है। हालांकि, शाह के हालिया पंजाब दौरे और नशे के खिलाफ अभियान के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी इस लक्ष्य की व्यवहारिकता पर सवाल उठा रही है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि इस दिशा में पिछले सात वर्षों से लगातार काम किया जा रहा है।

पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासी घमासान

दशहरे के दिन अमित शाह के पंजाब दौरे और रावण के पुतले के साथ चिट्टे के दहन के कार्यक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे में तीन साल के भीतर इससे पूरी तरह छुटकारा पाने के लक्ष्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की ओर से इस घोषणा को चुनावी मुद्दे के तौर पर पेश किए जाने की बात कही जा रही है। आलोचकों का तर्क है कि दशकों से चली आ रही नशे की समस्या को केवल तीन साल में खत्म करना आसान नहीं होगा।

माओवाद के खिलाफ अभियान का दिया उदाहरण

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देश को 31 मार्च 2026 तक माओवाद की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य घोषित किए जाने पर भी इसी तरह के सवाल उठे थे। अधिकारी ने कहा कि बाद में इस लक्ष्य को हासिल कर लिया गया।

उनके अनुसार, माओवाद के खिलाफ अभियान के बाद अब अमित शाह की प्राथमिकताओं में देश को नशे की समस्या से मुक्त करना शामिल है। सरकार का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी व्यवस्था और समन्वय पर काम किया जा रहा है।

सात साल से तैयार हो रहा नशे के खिलाफ तंत्र

गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 31 दिसंबर 2029 तक देश को ड्रग्स की समस्या से मुक्त करने की घोषणा भले ही हाल में की गई हो, लेकिन इसकी तैयारी पिछले सात वर्षों से चल रही है। गृह मंत्री बनने के बाद से ही अमित शाह ने नशे की तस्करी रोकने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करने पर जोर दिया।

इसके तहत जिला, राज्य और केंद्रीय स्तर पर नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी एनकोर्ड का गठन किया गया है। इन केंद्रों के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने और नशे की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारी के अनुसार, अमित शाह इन केंद्रों की बैठकों पर भी नजर रखते हैं।

तस्करी के रास्तों की मैपिंग, सरगनाओं का डेटाबेस तैयार

नशे की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए देशभर में तस्करी के रास्तों की पहचान और मैपिंग की गई है। इसके अलावा, इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों का अलग डेटाबेस भी तैयार किया गया है।

विदेशों से गिरोह चलाने वाले सरगनाओं तक पहुंचने और उन्हें भारत लाने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाया गया है। अधिकारी के मुताबिक, संयुक्त प्रयासों के जरिए संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किये जैसे देशों में पहचान छिपाकर रह रहे कुछ सरगनाओं की पहचान कर उन्हें भारत लाने में सफलता मिली है।

मुंद्रा पोर्ट से लक्षद्वीप तक बड़ी बरामदगियां

नशे की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के उदाहरण देते हुए अधिकारी ने मुंद्रा पोर्ट पर करीब पांच साल पहले 21 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी का उल्लेख किया। हाल के दिनों में लक्षद्वीप के नजदीक लगभग 3,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी और पाकिस्तानी तस्करों की गिरफ्तारी को भी एजेंसियों की कार्रवाई का अहम उदाहरण बताया गया।

अधिकारी के अनुसार, नशे की बरामदगी की मात्रा और कीमत के साथ-साथ तस्करी करने वाले गिरोहों को ध्वस्त करने से जुड़े आंकड़ों में भी कार्रवाई के नतीजे दिखाई देते हैं। सरकार का जोर अब इन प्रयासों को और तेज कर तय समयसीमा के भीतर देश को नशे की समस्या से मुक्त करने पर है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.