Iran US War Timeline: 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक जंग की पूरी कहानी, हमले, तबाही और आखिरकार सीजफायर तक का सफर

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ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े इस बड़े युद्ध ने कुछ ही हफ्तों में मिडिल ईस्ट से लेकर पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग ने सैन्य टकराव, आर्थिक संकट और वैश्विक अस्थिरता को चरम पर पहुंचा दिया। आइए समझते हैं, इस पूरे संघर्ष की टाइमलाइन—कब क्या हुआ और कैसे हालात सीजफायर तक पहुंचे।

28 फरवरी: ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ से युद्ध की शुरुआत
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ से हुई। अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। शुरुआती 12 घंटों में ही लगभग 900 हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और नेता मारे गए। मिसाइल साइट, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

ईरान का ताबड़तोड़ जवाब, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
इस बड़े हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर सैकड़ों मिसाइलें और हजारों ड्रोन दागे गए। हालात इतने बिगड़े कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं।

मार्च: पूरे मिडिल ईस्ट में फैली जंग, भारी तबाही
मार्च महीने में यह संघर्ष तेजी से फैल गया। ईरान ने अमेरिकी सैन्य और ऊर्जा ठिकानों के साथ-साथ इज़रायल और खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया। जवाब में अमेरिका-इज़रायल ने भी हमले तेज कर दिए। दोनों तरफ से हजारों लोगों की मौत हुई, बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और लाखों नागरिक विस्थापित हो गए।

दोनों पक्षों को भारी नुकसान, सैन्य और नागरिक ढांचे तबाह
अमेरिका और इज़रायल ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया, लेकिन उन्हें भी भारी क्षति उठानी पड़ी। कई फाइटर जेट, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य संसाधन नष्ट हो गए। वहीं ईरान में ऊर्जा संयंत्र, गैस और बिजली ढांचा, रिहायशी इलाके और ऐतिहासिक इमारतें तबाह हो गईं। विश्वविद्यालय और अन्य संस्थान खंडहर में बदल गए।

ट्रंप के बदलते बयान और बढ़ता विवाद
युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार बयान बदलते रहे। कभी उन्होंने कहा कि जंग 4-6 हफ्तों में खत्म हो जाएगी, तो कभी ईरान को घंटों का अल्टीमेटम दिया। बाद में कई बार अपने ही बयानों से पीछे हटते नजर आए। उनके इन रुखों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ी और अमेरिकी राजनीति में भी विरोध देखने को मिला।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर गतिरोध कायम
पूरे संघर्ष के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा। अमेरिका के दबाव, धमकियों और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिशों के बावजूद इसे खुलवाया नहीं जा सका। अंततः ट्रंप ने अपना अल्टीमेटम वापस लेते हुए कहा कि यह अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है।

ईरान को कड़ी धमकी, बढ़ा तनाव
जंग लंबी खिंचने पर ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज नहीं खोला गया तो “सभ्यता मिटा देंगे”। यह बयान तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हुआ। साथ ही उन्होंने 7 अप्रैल को बड़े हमले की भी धमकी दी।

8 अप्रैल: सीजफायर का ऐलान, जंग पर ब्रेक
लगातार बढ़ते तनाव के बीच 8 अप्रैल को ट्रंप ने दो हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है। साथ ही ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर शुरुआती सहमति जताई गई। अमेरिका ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, जबकि ईरान ने दावा किया कि उसकी शर्तें मान ली गई हैं।

हमलों में मारे गए ईरान के प्रमुख नेता
इस युद्ध में ईरान के कई शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों की मौत हुई, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, अली शमखानी, मोहम्मद पाकपूर, अब्दोलरहीम मुसावी, अज़ीज़ नासिरजादेह, अली लारिजानी, ग़ोलामरेज़ा सोलैमानी, इस्माइल ख़ातिब, मजीद ख़ादेमी और अली तंगसीरी शामिल हैं।

 

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