होर्मुज से परमाणु कार्यक्रम तक उलझी अमेरिका-ईरान वार्ता, इस्लामाबाद बैठक से पहले बढ़ा तनाव; समझौते पर संशय बरकरार
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक कई अहम मुद्दों पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं, जिससे किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।
10 सूत्रीय ईरानी प्रस्ताव और अमेरिकी रुख में बड़ा अंतर
वार्ता को लेकर तैयार 10 सूत्रीय ईरानी प्रस्ताव और अमेरिका की पूर्व 15 सूत्रीय योजना में बहुत कम समानताएं बताई जा रही हैं। अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जबकि ईरान इसे अपनी शर्तों में शामिल किए हुए है। इसी तरह ईरान की मिसाइल क्षमताओं को लेकर भी दोनों देशों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है।
परमाणु और मिसाइल मुद्दों पर अटकी बातचीत
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, जबकि ईरान इन मुद्दों पर बातचीत करने को तैयार नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार ईरान प्रतिबंधों में राहत और पुनर्निर्माण सहायता जैसी मांगों पर जोर दे सकता है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन को लेकर समझौते की संभावना बेहद कम है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद का केंद्र
इस बार वार्ता का सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य बताया जा रहा है। ईरान ने संकेत दिया है कि शांति समझौते की स्थिति में वह इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूल सकता है। दूसरी ओर अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने समझौता नहीं किया और मार्ग नहीं खोला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दोनों देशों के प्रस्तावों में गहरी खाई
रिपोर्ट के अनुसार ईरान की 10 सूत्रीय योजना में हमले न करने, प्रतिबंध हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी और होर्मुज पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं अमेरिकी प्रस्ताव में ईरान के यूरेनियम भंडार को हटाने, संवर्धन रोकने, मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण और क्षेत्रीय गतिविधियों पर रोक लगाने की शर्तें शामिल हैं।
स्थायी समझौते की संभावना पर सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में किसी बड़े समझौते की संभावना कम है, क्योंकि दोनों देश अपने रणनीतिक हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता रखता है, जबकि होर्मुज जलमार्ग उसे रणनीतिक बढ़त भी देता है।
इजरायल और लेबनान मुद्दे से बढ़ी जटिलता
इजरायल की ओर से लेबनान में हिजबुल्लाह पर लगातार कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव भी इस वार्ता को प्रभावित कर रहा है। इजरायल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्षों को युद्धविराम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।