केरल में ED की बड़ी कार्रवाई! पूर्व CM पिनाराई विजयन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी, बेटी की IT कंपनी जांच के घेरे में

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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। यह कार्रवाई उनकी बेटी वीणा विजयन की आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ और कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) के बीच कथित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक ईडी की टीमें राज्यभर में करीब 10 स्थानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इन ठिकानों में पिनाराई विजयन का आवास भी शामिल बताया जा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई जांच

ईडी की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले ही केरल हाईकोर्ट ने मामले में अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने CMRL और वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के खिलाफ चल रही ईडी जांच पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी।

कोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसी ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी। सूत्रों के मुताबिक ईडी लंबे समय से दोनों कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही थी।

जांच एजेंसी को शक है कि जिन भुगतानों को कागजों में आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाओं के बदले दिखाया गया, उनके बदले कोई वास्तविक सेवा नहीं दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब आयकर विभाग ने CMRL के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान सामने आया कि 2017 से 2019 के बीच CMRL ने वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को करीब 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

आरोप है कि यह भुगतान बिना किसी वास्तविक सेवा के किया गया और इसे कंपनी के खातों में ‘फर्जी खर्च’ के रूप में दिखाया गया। इसी आधार पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

अदालत में क्या दलीलें दी गईं?

CMRL के प्रबंध निदेशक एस.एन. शशिधरन कार्था और अन्य अधिकारियों ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ईडी द्वारा दर्ज ECIR और जारी समन को रद्द करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस मामले में PMLA के तहत कोई “अनुसूचित अपराध” नहीं बनता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मामले की जांच पहले से ही गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय यानी SFIO कर रहा है, इसलिए ईडी की अलग जांच की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि जस्टिस टी.आर. रवि की पीठ ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ईडी को बिना औपचारिक FIR के भी पूछताछ और समन जारी करने का अधिकार है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि SFIO और ईडी दोनों एजेंसियों की जांच का दायरा और उद्देश्य अलग-अलग हैं।

 

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