मुंबई के जिमखानों पर सरकार की नजर, 16 प्रतिष्ठित क्लबों की लीज और जमीन की होगी समीक्षा; नई नीति की तैयारी

0 25

मुंबई: दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद अब महाराष्ट्र में भी सरकारी जमीन पर संचालित जिमखानों और क्लबों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ऐसी नई नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में सरकारी भूमि पर बने जिमखानों की कार्यप्रणाली, लीज व्यवस्था और सदस्यता प्रणाली की समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इन संस्थानों को अधिक पारदर्शी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना बताया जा रहा है।

सरकारी जमीन पर बने क्लबों की होगी व्यापक समीक्षा

राजस्व एवं वन विभाग ने फरवरी 2026 में जारी एक सरकारी प्रस्ताव के तहत राज्यभर के जिमखानों और क्लबों की मौजूदा नीतियों की समीक्षा के लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया था। सरकार का मानना है कि रियायती दरों पर दी गई सरकारी जमीनों का उपयोग अधिक समावेशी तरीके से होना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को भी इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।

सदस्यता और राजस्व मॉडल पर भी होगा मंथन

नई नीति के तहत क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ-साथ उनके मौजूदा राजस्व मॉडल का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार इस बात की समीक्षा कर रही है कि सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग किस प्रकार हो रहा है और उनसे आम जनता को कितना लाभ मिल रहा है।

मुंबई में बड़े हिस्से पर जिमखानों का कब्जा

जगह की कमी से जूझ रहे मुंबई शहर में जिमखाने और क्लब बड़े भू-भाग पर फैले हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शहर के कुल खुले स्थानों का एक बड़ा हिस्सा इन संस्थानों के पास है, जबकि आम नागरिकों के लिए प्रति व्यक्ति खुला क्षेत्र बेहद सीमित है। यही वजह है कि सरकार इन जमीनों के उपयोग और प्रबंधन की समीक्षा पर विशेष जोर दे रही है।

16 जिमखानों को कलेक्टर कार्यालय ने बुलाया

मुंबई के 20 से अधिक जिमखानों में से 16 कलेक्टर की जमीन पर संचालित हो रहे हैं। ये भूमि ब्रिटिश काल में बेहद कम दरों पर लीज पर दी गई थी। हाल ही में कलेक्टर कार्यालय ने इन सभी जिमखानों के पदाधिकारियों को अतिरिक्त कलेक्टर के साथ बैठक के लिए बुलाया है। इसके साथ ही सरकारी अधिकारियों की टीमों ने इन परिसरों का भौतिक निरीक्षण भी किया है।

जमीन के उपयोग और निर्माण कार्यों की जांच

निरीक्षण के दौरान भूमि रिकॉर्ड, वास्तविक उपयोग, लीज की शर्तों के पालन और किसी भी संभावित अनधिकृत निर्माण या बदलाव की जांच की गई। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लीज पर दी गई भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप ही हो रहा है।

बढ़ सकती है लीज फीस और अतिरिक्त शुल्क

सूत्रों के अनुसार, सरकार जिमखानों की लीज और लाइसेंस फीस बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसके अलावा यदि क्लब परिसरों में विवाह समारोह, संगीत कार्यक्रम, बैंक्वेट या अन्य व्यावसायिक आयोजन किए जाते हैं तो उन पर अतिरिक्त शुल्क या विशेष कर लगाने की संभावना भी जताई जा रही है।

महालक्ष्मी रेसकोर्स मॉडल से जुड़ी चर्चा

इस पहल को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स मामले के बाद और गति मिली है। वर्ष 2024 में बृहन्मुंबई नगर निगम ने रेसकोर्स की बड़ी भूमि अपने नियंत्रण में लेकर उसे सार्वजनिक पार्क के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब सरकार सार्वजनिक उपयोग के लिए अन्य बड़े भू-भागों की संभावनाओं का भी आकलन कर रही है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.