संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, 97 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; संसदीय परंपराओं के प्रमुख स्तंभ थे

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नई दिल्ली: देश के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, संसदीय मामलों के विद्वान और पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार, कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट के कारण उनका निधन हुआ। उनके निधन से देश के विधिक, संसदीय और संवैधानिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. कश्यप को भारतीय संविधान, संसदीय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी गहरी समझ के लिए देश-विदेश में सम्मान प्राप्त था। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संसदीय व्यवस्था को मजबूत बनाने और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप देश के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे और संसदीय तथा संवैधानिक विमर्श को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री ने उनके लेखन, विचारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति समर्पण को उल्लेखनीय बताते हुए परिजनों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनके योगदान को याद किया।

स्वतंत्रता सेनानी परिवार से था संबंध

डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में हुआ था। उनका परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा और किशोरावस्था में ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था।

37 वर्षों तक संसद से जुड़े रहे

उन्होंने वर्ष 1953 में संसद सचिवालय से अपने प्रशासनिक और संसदीय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद लगभग 37 वर्षों तक संसद की विभिन्न जिम्मेदारियों से जुड़े रहे। वर्ष 1984 से 1990 के बीच उन्होंने 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संसदीय कार्यप्रणाली और विधायी प्रक्रियाओं पर उनकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उन्होंने जिनेवा स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन का नेतृत्व भी किया था।

संविधान और कानून के क्षेत्र में निभाई अहम भूमिका

डॉ. कश्यप ने पंचायती राज से जुड़े कानूनों के निर्माण और सुधार में भारत सरकार के सलाहकार के रूप में योगदान दिया। संविधान के कार्यान्वयन और समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग में भी उन्होंने सदस्य और प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी।

इसके अलावा, वह लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर भी रहे और विधिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान देते रहे।

2015 में मिला था पद्म भूषण सम्मान

देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया था।

डॉ. कश्यप ने संसदीय व्यवस्था, संविधान और भारतीय लोकतंत्र पर अनेक पुस्तकें लिखीं। उनकी रचनाएं आज भी विधि के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रशासनिक अभ्यर्थियों और संसदीय मामलों के जानकारों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री मानी जाती हैं।

 

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