E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद! वाहन चालकों ने उठाए सवाल, माइलेज में 30% तक गिरावट की शिकायत से बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली: देश में तेल आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए E20 पेट्रोल को लेकर अब नई बहस छिड़ गई है। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में तय समय से पहले ही देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध करा दिया था। हालांकि इसके इस्तेमाल के बाद कई वाहन चालकों ने माइलेज में कमी और वाहन प्रदर्शन पर असर पड़ने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।

कुछ वाहन मालिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल के उपयोग के बाद उनके वाहनों का माइलेज 20 से 30 फीसदी तक घट गया है। इसके साथ ही स्पार्क प्लग खराब होने और इंजन पर अतिरिक्त दबाव जैसी समस्याओं की भी शिकायतें सामने आ रही हैं।

क्या है E20 पेट्रोल और क्यों किया गया लागू?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार ने इसे देश में ईंधन आयात पर होने वाले भारी खर्च को कम करने और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू किया है।

एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसी रणनीति के तहत पूरे देश में E20 पेट्रोल को तेजी से लागू किया गया है।

माइलेज घटने की शिकायतों ने बढ़ाई टेंशन

E20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने की शिकायत की है। कुछ लोगों का कहना है कि पहले की तुलना में उनके वाहन कम दूरी तय कर रहे हैं, जिससे ईंधन खर्च बढ़ गया है।

हालांकि सरकारी अनुमान इसके उलट तस्वीर पेश करते हैं। अधिकारियों के अनुसार E20 के अनुकूल वाहनों में माइलेज पर केवल 2 से 6 प्रतिशत तक असर पड़ना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने वाहनों में यह प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है क्योंकि उन्हें E20 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किया गया था।

पुराने वाहनों पर ज्यादा असर की आशंका

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार E20 पेट्रोल का प्रभाव वाहन की तकनीक और इंजन डिजाइन पर भी निर्भर करता है। जिन वाहनों को E20 संगत तकनीक के साथ तैयार किया गया है, उनमें प्रदर्शन और माइलेज पर सीमित असर देखने को मिल सकता है।

वहीं पुराने मॉडल के वाहनों में ईंधन दक्षता कम होने, इंजन के कुछ हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और रखरखाव खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

E85 और E100 की दिशा में बढ़ रहा भारत

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। सरकार भविष्य में E85 और E100 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के उपयोग को भी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

हालांकि इस योजना को लेकर कुछ विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को पूरी तरह बढ़ावा देने से पहले उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए। कई लोग सामान्य पेट्रोल और E20 दोनों विकल्प बाजार में बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है?

E20 नीति को भारत के ऊर्जा भविष्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लेकिन इसकी सफलता काफी हद तक उपभोक्ताओं के अनुभव और वाहन प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

यदि माइलेज में कमी और तकनीकी समस्याओं को लेकर शिकायतें बढ़ती हैं, तो सरकार और वाहन निर्माताओं को मिलकर ऐसे समाधान तलाशने पड़ सकते हैं जो पर्यावरण, किसानों और उपभोक्ताओं—तीनों के हितों के बीच संतुलन बना सकें।

 

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