TMC को एक और बड़ा झटका! राज्यसभा से सुष्मिता देब का इस्तीफा, हिमंत सरमा से मुलाकात के बाद तेज हुईं राजनीतिक अटकलें

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। एक सप्ताह के भीतर पार्टी के दूसरे सांसद के इस्तीफे ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की खबर सामने आई है, जिसके बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुष्मिता देब की यह मुलाकात भविष्य के किसी बड़े राजनीतिक समीकरण का संकेत हो सकती है। चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी उन्हें असम से राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने बढ़ाई चर्चाएं

राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देब ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस मुलाकात के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

टीएमसी पहले ही आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे समय में एक और प्रमुख चेहरे का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

एक हफ्ते में दूसरा इस्तीफा

सुष्मिता देब से पहले सुखेंदु शेखर राय भी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दल भी इन घटनाक्रमों को लेकर टीएमसी नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

सुष्मिता देब दिवंगत कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं और असम के सिलचर से ताल्लुक रखती हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर सिलचर से सांसद चुनी गई थीं।

कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। वह करीब तीन दशक तक कांग्रेस से जुड़ी रहीं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिनी जाती थीं।

2021 में छोड़ी थी कांग्रेस, टीएमसी में हुई थीं शामिल

साल 2021 में सुष्मिता देब ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया था।

संसद में उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में काम किया और महिला मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई। उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में भी माना जाता था।

टीएमसी में बढ़ रही अंदरूनी हलचल

विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया था कि टीएमसी के करीब 20 सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जाने की इच्छा रखते हैं।

बताया गया था कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया था। काकोली घोष दस्तीदार फिलहाल टीएमसी के बागी खेमे की प्रमुख आवाज मानी जा रही हैं और उन्हें उस गुट का मुख्य सचेतक बनाया गया है।

सुष्मिता देब के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी है। यदि वह किसी नए दल में शामिल होती हैं, तो इसका असर सिर्फ असम ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

 

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