‘डीएम बने बेटे समान’, रोती हुई बुजुर्ग महिला की मदद को आगे आए जिलाधिकारी; थैले में रख दिए 22 हजार रुपये, बोले- अब आपकी हर परेशानी दूर होगी
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मादंड़ का संवेदनशील और मानवीय चेहरा एक बार फिर सामने आया है। वृद्धावस्था पेंशन बंद होने से परेशान 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला जब अपनी समस्या लेकर कलक्ट्रेट पहुंचीं, तो जिलाधिकारी ने न केवल उनकी बात गंभीरता से सुनी बल्कि तत्काल राहत देते हुए अपने मानदेय से मिले 22 हजार रुपये भी उनके थैले में रख दिए। इस दौरान उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि अब उनकी सभी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
बुजुर्ग महिला ने जिलाधिकारी को बताया कि पति के निधन के बाद उनकी जिंदगी संघर्षों से घिर गई है। बच्चों द्वारा घर बेच दिए जाने के बाद वह किराए के एक छोटे से कमरे में अकेले रहने को मजबूर हैं। कोरोना काल के बाद कामकाज भी बंद हो गया और गुजारे का एकमात्र सहारा वृद्धावस्था पेंशन थी, जो कई महीनों से नहीं मिल रही थी। महिला ने कहा कि राशन कार्ड होने के बावजूद रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
महिला की व्यथा सुनकर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मादंड़ भावुक हो गए। उन्होंने मौके पर ही समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से बात की और वृद्धा पेंशन तत्काल जारी कराने के निर्देश दिए। साथ ही राशन और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।
इसके बाद जिलाधिकारी ने अपनी परीक्षा ड्यूटी से प्राप्त 22 हजार रुपये का मानदेय महिला के थैले में रख दिया। उन्होंने बुजुर्ग महिला से कहा कि अब चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और प्रशासन उनकी हर संभव मदद करेगा। जिलाधिकारी ने अपना और अपने स्टाफ का संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराया तथा कहा कि भविष्य में किसी भी समस्या के लिए सीधे फोन कर सकती हैं।
जिलाधिकारी के इस व्यवहार से बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं और उन्होंने उन्हें बेटे समान बताते हुए आशीर्वाद दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस संवेदनशील पहल की सराहना की।
यह पहला अवसर नहीं है जब जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मादंड़ ने किसी जरूरतमंद की मदद के लिए व्यक्तिगत पहल की हो। इससे पहले भी वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा में सहयोग, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी कार्यशैली को आम लोगों के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण का उदाहरण माना जाता है।