नई दिल्ली: गल्फ ऑफ ओमान में भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारतीय जहाजों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप का दावा: भारतीय जहाजों पर ईरान ने किया ड्रोन हमला
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों को ईरान की ओर से ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती और ईरान को अपनी हरकतों पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
गल्फ ऑफ ओमान में लगातार हमलों से बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, 8, 9 और 11 जून को गल्फ ऑफ ओमान क्षेत्र में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है और समुद्री यातायात पर भी असर देखा जा रहा है।
भारतीय नागरिकों की मौत का दावा, जांच जारी
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि 9 जून को हुए हमले में भारत के चार नागरिकों की मौत हुई थी। हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और जांच प्रक्रिया जारी है।
अमेरिका ने जारी किया वीडियो, ईरान पर आरोप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक कॉमर्शियल जहाज पर हमले का वीडियो जारी करते हुए दावा किया था कि यह हमला उसी अभियान का हिस्सा है। हालांकि, इस घटना को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है और ट्रंप के बयान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ईरान-अमेरिका के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
जहां एक ओर अमेरिका की ओर से ईरान पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ किसी भी तरह की डील को लेकर किए गए दावे ‘फेक न्यूज’ हैं और उनके मुताबिक ईरान भरोसेमंद साझेदार नहीं है।
भारत ने जताई आपत्ति, अमेरिकी दूतावास को तलब किया
घटनाओं के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी दूतावास के चार्ज ड’अफेयर्स को तलब किया और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। भारत ने सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थिति तनावपूर्ण, कूटनीतिक हल की कोशिशें जारी
लगातार हो रहे हमलों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। भारत, अमेरिका और ईरान के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावना भी देखी जा रही है।