‘मृत’ घोषित महिला 17 घंटे बाद हुई जिंदा! अंतिम संस्कार से ठीक पहले पकड़ा भांजे का हाथ, आगरा की घटना से हर कोई हैरान
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। 65 वर्षीय शीला देवी को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए। लेकिन करीब 17 घंटे बाद अंतिम संस्कार से ठीक पहले महिला के शरीर में हलचल हुई और उन्होंने पास खड़े अपने भांजे का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। जहां कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे चिकित्सकीय लापरवाही से जोड़कर देख रहे हैं।
इलाज के दौरान डॉक्टरों ने किया था मृत घोषित
जानकारी के अनुसार, आगरा की श्रीनगर कॉलोनी निवासी 65 वर्षीय शीला देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन उनका पार्थिव शरीर लेकर घर पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं।
परिजनों ने रिश्तेदारों और परिचितों को भी सूचना दे दी थी, जिसके बाद अंतिम विदाई के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।
अंतिम संस्कार से पहले अचानक शरीर में हुई हलचल
परिजनों के मुताबिक, अंतिम संस्कार की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान शीला देवी के शरीर में अचानक हरकत दिखाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने पास खड़े अपने भांजे का हाथ पकड़ लिया। यह देखकर वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए।
महिला के जीवित होने का एहसास होते ही परिजन उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है।
17 घंटे बाद जीवित होने की खबर से मची सनसनी
परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के लगभग 17 घंटे बाद शीला देवी में जीवन के संकेत दिखाई दिए। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके घर और अस्पताल पहुंचने लगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे दैवीय चमत्कार बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे डॉक्टरों की संभावित चूक मान रहे हैं।
दो बेटों का है परिवार
परिजनों ने बताया कि शीला देवी लंबे समय से बीमार थीं। मंगलवार सुबह उनकी तबीयत अधिक खराब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। उनके परिवार में दो बेटे हैं। बड़ा बेटा आगरा में परचून की दुकान चलाता है, जबकि छोटा बेटा बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत है।
महिला के जीवित होने की खबर से परिवार में खुशी का माहौल है, जबकि इस पूरे मामले ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।