RBI का सख्त फैसला! इस बैंक से निकासी पर लगी सीमा, 6 महीने तक कई सेवाओं पर रोक

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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक ने एक सहकारी बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को देखते हुए बड़ा नियामकीय कदम उठाया है। ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए मोगावीरा सहकारी बैंक पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इस फैसले के बाद बैंक के खाताधारकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, बैंक के ग्राहक अब अपने खातों से अधिकतम एक लाख रुपये तक ही राशि निकाल सकेंगे। यह सीमा बचत, चालू और अन्य सभी प्रकार के खातों पर लागू होगी। ये प्रतिबंध 12 जून को कारोबार समाप्त होने के बाद लागू किए गए हैं और फिलहाल छह महीने तक प्रभावी रहेंगे।

लोन, निवेश और नई जमा राशि पर भी रोक

नए निर्देशों के तहत बैंक किसी भी नए ऋण को मंजूरी नहीं दे सकेगा। साथ ही पुराने ऋणों का नवीनीकरण भी नहीं किया जा सकेगा। बैंक को निवेश करने, नई देनदारियां लेने, उधार जुटाने और नए जमा स्वीकार करने से भी रोक दिया गया है।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह कदम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंक की नकदी स्थिति को ध्यान में रखते हुए निकासी की सीमा तय की गई है।

सुधार के लिए दिए गए थे कई मौके

रिजर्व बैंक के अनुसार, बैंक के संचालन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए वह लगातार बैंक के निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के संपर्क में था। इसके बावजूद निगरानी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। इसी कारण नियामकीय कार्रवाई जरूरी हो गई।

हाल ही में एक और सहकारी बैंक का लाइसेंस हुआ था रद्द

इससे पहले मई महीने में महाराष्ट्र के फलटन स्थित एक सहकारी बैंक का लाइसेंस भी रद्द किया गया था। केंद्रीय बैंक ने उस बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और भविष्य की आय की संभावनाएं नहीं होने का हवाला देते हुए कार्रवाई की थी।

आरबीआई ने उस मामले में राज्य के सहकारिता विभाग से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया था। साथ ही यह भी बताया गया था कि पात्र जमाकर्ताओं को जमा बीमा योजना के तहत निर्धारित सीमा तक सुरक्षा मिलेगी।

खाताधारकों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में खाताधारकों को घबराने के बजाय बैंक और नियामक संस्थाओं की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए। आरबीआई समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करेगा और आवश्यकतानुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

 

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