US-ईरान समझौते के बाद क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? 19 जून के नए रेट जारी, जानिए आपके शहर में कितना है भाव

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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी के बीच आम लोगों की नजर पेट्रोल और डीजल के दामों पर टिकी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक तेल बाजार में दबाव कम हुआ है, लेकिन फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी बड़ी राहत का ऐलान नहीं हुआ है। 19 जून के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने नए रेट जारी कर दिए हैं।

आज जारी ताजा कीमतों के अनुसार देश के अधिकांश शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। हालांकि कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है।

देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है।

इसके अलावा कुछ शहरों में कीमतों में हल्का बदलाव दर्ज किया गया है। गुरुग्राम, नोएडा, जयपुर और हैदराबाद में ईंधन के दामों में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि लखनऊ और भुवनेश्वर में कीमतों में हल्की राहत देखने को मिली है।

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, बाजार की नजर आगे की चाल पर

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते एक सप्ताह में ब्रेंट क्रूड में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे हाल के महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में शामिल माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कम होने का संकेत है, जिससे आगे चलकर ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है।

क्या जल्द सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?

केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करतीं। परिवहन लागत, पहले खरीदे गए कच्चे तेल की कीमत, कर व्यवस्था और बाजार की स्थितियां भी ईंधन दरों को प्रभावित करती हैं।

सरकार के अनुसार कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत पहुंचने और रिफाइन होकर बाजार तक आने में समय लगता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

युद्धकाल में सरकार पर बढ़ा आर्थिक दबाव

पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सरकार का दावा है कि बढ़ती लागत का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया, जिसके कारण सरकारी तेल कंपनियों और राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा। अनुमान के मुताबिक इस दौरान सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ा।

पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर नहीं है कोई संकट

तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सभी प्रमुख रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और ईंधन भंडार भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।

US-ईरान समझौते का तेल बाजार पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। यही मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है। आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम होने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव घटा है और बाजार में स्थिरता लौटती दिखाई दे रही है।

फिलहाल बड़ी राहत के आसार नहीं

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि तत्काल प्रभाव से बड़े पैमाने पर कटौती की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

 

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