होर्मुज स्ट्रेट खुला, लागू हुई अमेरिका-ईरान डील… फिर भी क्यों खत्म नहीं हुई चिंता? 60 दिन में होंगे बड़े फैसले
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव को विराम देने वाला अंतरिम शांति समझौता लागू हो गया है। समझौते के प्रभाव में आते ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है। अमेरिका ने ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी भी हटा ली है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कई ऐसे मुद्दे हैं जो अब भी दोनों देशों के बीच विवाद की वजह बने हुए हैं।
समझौते के लागू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत का माहौल दिखाई दिया। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति जिस समुद्री मार्ग से गुजरती है, उसके सामान्य होने से व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
तेल बाजार को राहत, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बरकरार
हालांकि समझौते के बावजूद पश्चिम एशिया में पूरी तरह शांति नहीं लौटी है। लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है। गुरुवार को इजराइली सेना ने लेबनान में नए हवाई हमले किए, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह शांति प्रक्रिया लंबे समय तक टिक पाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्ष जारी रहने से समझौते की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप पर अपनी ही पार्टी के नेताओं के सवाल
अमेरिका में भी इस समझौते को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी गई हैं।
वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने दावा किया कि अमेरिका ने मजबूरी में यह समझौता किया है। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे होने वाली बातचीत आसान नहीं रहने वाली है और ईरान अतिरिक्त दबाव स्वीकार नहीं करेगा।
परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलें बनीं सबसे बड़ी चुनौती
अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों को अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में प्रयास करना होगा। यही अवधि आगे के संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आगामी वार्ताओं में ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता भी प्रमुख मुद्दा रहेगी। अमेरिका पहले से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों को मिलने वाले समर्थन पर आपत्ति जताता रहा है।
300 अरब डॉलर की राहत योजना पर भी चर्चा
समझौते में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक सहायता के लिए 300 अरब डॉलर तक के फंड और विभिन्न आर्थिक राहत उपायों का भी प्रावधान बताया जा रहा है। हालांकि इस पैकेज की शर्तें और अंतिम स्वरूप अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक सहयोग और प्रतिबंधों में राहत की प्रक्रिया भी आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।
60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट पर रहेगा ईरान का नियंत्रण
ईरान ने घोषणा की है कि अगले 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही की निगरानी और संचालन उसके नियंत्रण में रहेगा। जहाजों को आवश्यक अनुमति जारी की जाएगी और समुद्री यातायात को व्यवस्थित किया जाएगा। हालांकि इस दौरान किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इजराइल को भी संयम बरतने की सलाह
अमेरिकी नेतृत्व ने इजराइल से भी अपील की है कि वह शांति प्रक्रिया का सम्मान करे और क्षेत्रीय तनाव को और न बढ़ाए। अमेरिका चाहता है कि युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाकर व्यापक स्थिरता सुनिश्चित की जाए।
अगले 60 दिन क्यों हैं सबसे अहम?
अंतरिम समझौते ने तत्काल युद्ध और ऊर्जा संकट के खतरे को टाल दिया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नीति, क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक राहत जैसे मुद्दे अभी भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे में आने वाले 60 दिन यह तय करेंगे कि यह समझौता स्थायी शांति की दिशा में बढ़ता है या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है।