लखनऊ अग्निकांड ने उजाड़ दिए दो घर! दादी की तेहरवीं में आना था संयम, दोस्त सूरजभान की मौत की खबर अब तक मां से छिपाई गई

0 23

कानपुर: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कानपुर के दो परिवारों की खुशियां पलभर में छीन लीं। हादसे में 28 वर्षीय संयम विज और 25 वर्षीय सूरजभान सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों एक ही एनीमेशन स्टूडियो में कार्यरत थे और वर्षों से गहरे दोस्त भी थे। जैसे ही दोनों युवकों के निधन की सूचना कानपुर पहुंची, परिवारों में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

संयम विज गोविंद नगर के ब्लॉक-11 क्षेत्र के रहने वाले थे। परिवार पहले से ही शोक में डूबा हुआ था, क्योंकि कुछ दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था। मंगलवार को दादी की तेहरवीं का कार्यक्रम आयोजित होना था और संयम को भी इसमें शामिल होने के लिए घर पहुंचना था। परिजन उनके आने की राह देख रहे थे, लेकिन इससे पहले उनके निधन की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

पिता के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे संयम

परिजनों के मुताबिक, संयम अपने परिवार का बेहद जिम्मेदार सदस्य था। उनके पिता पुष्पराज विज का वर्षों पहले निधन हो चुका था। पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा संयम ने संभाला था। उनका बड़ा भाई शुभम गुरुग्राम में नौकरी करता है। हादसे की सूचना मिलते ही वह अपनी पत्नी के साथ कानपुर के लिए रवाना हो गया।

रिश्तेदारों का कहना है कि संयम मिलनसार, खुशमिजाज और मेहनती स्वभाव का युवक था। परिवार उसके भविष्य को लेकर कई सपने संजोए बैठा था। उसकी शादी की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं और रिश्तों पर चर्चा चल रही थी, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

सूरजभान की मौत की खबर मां को नहीं बताई गई

हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे युवक सूरजभान सिंह बर्रा-7 क्षेत्र के निवासी थे। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में उनकी मां मीरा देवी और छोटा भाई सम्राट हैं। सूरजभान नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रहते थे और हर सप्ताहांत कानपुर आकर परिवार के साथ समय बिताते थे।

रविवार को वह हमेशा की तरह काम पर लौटे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी। परिवार के सदस्य इस गहरे सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।

सूरजभान के भतीजे करन ने बताया कि उनकी मां को अभी तक बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। परिवार को आशंका है कि अचानक यह खबर सुनने से उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। ऐसे में परिजन फिलहाल उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

एक साथ पढ़ाई, नौकरी और फिर एक ही हादसे में मौत

दोनों युवकों के दोस्त और पड़ोसी भी इस घटना से स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संयम और सूरजभान हमेशा मदद के लिए आगे रहते थे। दोनों की दोस्ती पूरे इलाके में मिसाल मानी जाती थी। साथ पढ़ाई करने से लेकर एक ही क्षेत्र में नौकरी करने तक दोनों का साथ बना रहा, लेकिन नियति ने दोनों को एक ही हादसे में हमेशा के लिए जुदा कर दिया।

आग लगने के बाद नहीं मिल सका बाहर निकलने का मौका

परिजनों के अनुसार, हादसे के समय दोनों युवक उसी कार्यालय में मौजूद थे, जहां अचानक आग भड़क उठी। आग और धुएं ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। अंदर मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया और कई लोग फंस गए।

संयम के मामा सौरभ दुआ ने बताया कि इमारत में प्रवेश और निकास के लिए सेंसर आधारित गेट लगाए गए थे। आग लगने के बाद तकनीकी व्यवस्था प्रभावित हो गई, जिससे गेट समय पर नहीं खुल सके। उनका दावा है कि यदि निकास व्यवस्था सुचारु रूप से काम करती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

शवों के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे परिवार

हादसे के बाद कानपुर से बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार और मित्र लखनऊ पहुंच गए हैं। सभी पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने और शवों के घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक पारिवारिक कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं की चर्चा थी, वहां अब अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं।

एक ओर संयम के घर दादी की तेहरवीं की तैयारियां थीं, वहीं अब उसी परिवार को बेटे की अंतिम विदाई की तैयारी करनी पड़ रही है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल दो परिवारों से उनके जवान बेटे छीन लिए, बल्कि पूरे कानपुर को शोक और संवेदना में डुबो दिया है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.