अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोपों की गहन पड़ताल के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कराई जाए। साथ ही जांच एजेंसी को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ जांच पूरी करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है, ताकि दान राशि से जुड़े कथित गबन, हेराफेरी या भ्रष्टाचार के आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
दो अधिवक्ताओं ने दाखिल की जनहित याचिका
यह जनहित याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित ट्रस्ट को एक मजबूत निगरानी, नियामक और ऑडिट व्यवस्था विकसित करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है। ऐसे में वित्तीय मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
मौजूदा SIT की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित मौजूदा विशेष जांच दल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि बिना किसी प्राथमिकी या नियमित आपराधिक मामले के जांच शुरू कर दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रशासनिक अधिकारियों वाली जांच टीम के पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी हो सकती है। ऐसे मामलों की जांच एक स्वतंत्र और विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए।
‘श्रद्धालुओं के भरोसे से जुड़ा है मामला’
याचिका में कहा गया है कि राम जन्मभूमि से जुड़ी निधियों और कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आई रिपोर्टें चाहे अंततः सही साबित हों या गलत, लेकिन इन खबरों ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और उन लोगों के बीच चिंता पैदा की है, जिन्होंने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन और उसके निर्माण के लिए योगदान दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि धार्मिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को भी मजबूत बनाए रखने में मदद करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यदि अदालत याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत होती है, तो चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।