पासपोर्ट भी नहीं साबित करता नागरिकता! आधार-वोटर आईडी के बाद अब नया सवाल, आखिर भारत में नागरिकता का अंतिम सबूत क्या है?
नई दिल्ली: भारतीय नागरिकता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय के एक स्पष्टीकरण के बाद यह सवाल चर्चा के केंद्र में आ गया है कि आखिर भारत में नागरिकता साबित करने का सबसे पुख्ता दस्तावेज कौन सा है। लंबे समय से आम धारणा रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण होता है, लेकिन अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट का मूल उद्देश्य नागरिकता साबित करना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है।
14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
पासपोर्ट मिलने के बावजूद क्यों नहीं माना जाता अंतिम प्रमाण?
हालांकि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय के अनुसार इसका प्रमुख उद्देश्य नागरिकता प्रमाणित करना नहीं है। पासपोर्ट एक सरकारी यात्रा दस्तावेज है, जो विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से उल्लेख होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार इसे वापस लेने या सरेंडर कराने का अधिकार रखती है। ऐसे में पासपोर्ट धारक की पहचान और यात्रा सुविधा तो सुनिश्चित होती है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जाता।
आधार और वोटर आईडी को लेकर भी पहले हो चुकी है स्पष्टता
नागरिकता और पहचान के बीच अंतर को लेकर पहले भी कई बार स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन से जुड़ी सुनवाई के दौरान कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार का उपयोग व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए किया जाता है।
इसी तरह वोटर आईडी का उद्देश्य किसी व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने और मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना है। इसे भी नागरिकता का अंतिम दस्तावेज नहीं माना जाता।
कानून के मुताबिक कौन कहलाता है भारतीय नागरिक?
भारतीय नागरिकता का निर्धारण मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम और उससे जुड़े प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।
26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति जन्म के आधार पर भारतीय नागरिक माना जाता है।
1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता तभी प्राप्त होती है, जब उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।
वहीं 3 दिसंबर 2004 या उसके बाद जन्मे लोगों के लिए नियम और अधिक सख्त हैं। ऐसे मामलों में या तो दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक होने चाहिए या फिर एक भारतीय नागरिक हो तथा दूसरा अवैध प्रवासी न हो।
पासपोर्ट सेवाओं में बड़ा विस्तार, मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी सुधारों की भी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान 1.5 करोड़ से अधिक पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें अकेले पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ रही।
मंत्रालय ने बताया कि पुलिस सत्यापन की अवधि को छोड़कर अब पासपोर्ट जारी करने की औसत प्रक्रिया छह कार्यदिवस के भीतर पूरी हो रही है। इसके अलावा नागरिकों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर पहले की तुलना में काफी कम समय बिताना पड़ रहा है और औसतन 45 मिनट से भी कम समय में प्रक्रिया पूरी हो रही है।
एक दशक में छह गुना बढ़ा पासपोर्ट नेटवर्क
विदेश मंत्रालय के मुताबिक पासपोर्ट सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए देशभर में केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। करीब एक दशक पहले जहां देश में केवल 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 545 हो गई है। मंत्रालय का कहना है कि इसी विस्तार और तकनीकी सुधारों की वजह से पासपोर्ट सेवाओं की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और प्रभावी हुई है।