केदारनाथ रोपवे पर बड़ा अपडेट: पहाड़ों का तैयार हुआ 3डी डिजिटल नक्शा, अब 13 किमी की यात्रा होगी सिर्फ 30-40 मिनट में

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देहरादून: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित केदारनाथ रोपवे परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतरने की ओर बढ़ रही है। अत्याधुनिक तकनीक की मदद से सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच पूरे प्रस्तावित मार्ग का विस्तृत 3डी डिजिटल मैप तैयार कर लिया गया है। इसके साथ ही परियोजना डिजाइन के चरण से आगे बढ़ते हुए निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।

परियोजना से जुड़ी एजेंसियों ने लिडार सर्वे और विस्तृत वीडियोग्राफी के माध्यम से पूरे क्षेत्र का गहन अध्ययन किया है। पहाड़ों की ढलानों, चट्टानों की मजबूती, घाटियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षित मार्ग और टावरों के संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं।

30 से 40 मिनट में पूरी होगी केदारनाथ यात्रा

रोपवे परियोजना के पूरा होने के बाद केदारनाथ धाम तक पहुंचने का सफर पहले की तुलना में बेहद आसान हो जाएगा। वर्तमान में पैदल तय किए जाने वाले करीब 13 किलोमीटर लंबे मार्ग को यात्री मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा कर सकेंगे। इससे श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

लिडार तकनीक से हुआ पहाड़ों का डिजिटल अध्ययन

परियोजना के लिए लिडार तकनीक का उपयोग किया गया, जिसके तहत हेलीकॉप्टर से लाखों लेजर पल्स भेजकर पूरे क्षेत्र की उच्च-स्तरीय डिजिटल मैपिंग की गई। इस प्रक्रिया के जरिए पहाड़ों की ऊंचाई, ढलान, घाटियां, नाले, चट्टानों की स्थिति और संभावित भूस्खलन वाले क्षेत्रों की सटीक पहचान की गई।

इस सर्वे के आधार पर पूरे इलाके का त्रि-आयामी डिजिटल मॉडल तैयार किया गया है। साथ ही कैमरों के माध्यम से पूरे मार्ग की वीडियोग्राफी कर मौसम, प्राकृतिक बाधाओं और निर्माण संबंधी चुनौतियों का भी अध्ययन किया गया।

पहाड़ों के भीतर की मजबूती का भी हुआ परीक्षण

परियोजना क्षेत्र में जियो-टेक्निकल जांच के तहत विभिन्न स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण कर यह आकलन किया गया कि जमीन कितने भार को सहन कर सकती है और किन क्षेत्रों में मजबूत नींव तैयार की जा सकती है।

कंप्यूटर आधारित विश्लेषण के जरिए यह भी तय किया जा रहा है कि रोपवे टावरों और अन्य संरचनाओं की नींव किस स्थान पर और कितनी गहराई तक बनाई जाए, ताकि परियोजना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।

स्टेशन निर्माण के लिए सुरक्षित स्थानों की पहचान

सोनप्रयाग और गौरीकुंड में प्रस्तावित स्टेशनों के लिए जियो-टेक्निकल और टोपोग्राफी सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। ड्रोन, जीपीएस और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से पूरे क्षेत्र का विस्तृत भू-आकृतिक नक्शा तैयार किया गया, जिससे स्टेशन निर्माण के लिए उपयुक्त और सुरक्षित स्थानों की पहचान संभव हो सकी।

परियोजना का प्रारंभिक अलाइनमेंट तैयार कर लिया गया है, जबकि अंतिम अलाइनमेंट पर काम जारी है। इसके अलावा देहरादून से सोनप्रयाग तक वास्तविक आकार के कंटेनरों के साथ लॉजिस्टिक्स ड्राई रन भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस अभ्यास से निर्माण सामग्री और भारी मशीनों को परियोजना स्थल तक पहुंचाने में आने वाली संभावित चुनौतियों का भी आकलन किया गया।

वन भूमि स्वीकृति प्रक्रिया पर भी तेज हुआ काम

राज्य सरकार के अनुसार परियोजना से जुड़ी वन भूमि स्वीकृति प्रक्रिया पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि सभी आवश्यक सर्वेक्षण निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कराए जा रहे हैं और परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को गति दी गई है।

 

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