राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव की आहट! नया CEO नियुक्त करने की तैयारी, 11 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

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अयोध्या: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव की संभावनाएं तेज हो गई हैं। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच, कई आरोपितों के जेल जाने और दो ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। ऐसे में 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

SIT रिपोर्ट के बाद पुनर्गठन की चर्चा तेज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन की आवश्यकता जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ट्रस्ट के संचालन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाना चाहिए।

इसी सिफारिश के बाद ट्रस्ट में नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

11 जुलाई की बैठक बनी अहम

ट्रस्ट की अगली त्रैमासिक बैठक 11 जुलाई को प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। बैठक में दो ट्रस्टियों द्वारा दिए गए इस्तीफों पर भी विचार किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, बैठक से पहले केंद्र स्तर पर भी सीईओ नियुक्ति और ट्रस्ट की भावी संरचना को लेकर निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

दो पूर्व IAS अधिकारियों के नाम चर्चा में

नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दो सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से ही संभावित दावेदारों में शामिल माना जा रहा था। अब पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वरराम मिश्र का नाम भी चर्चाओं में सामने आया है।

योगेश्वरराम मिश्र वर्ष 2005 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण में प्रशासनिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। वह वर्ष 2016 में कुछ समय के लिए अयोध्या के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं।

दो ट्रस्टियों के इस्तीफे पर होगा फैसला

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने, प्राथमिकी दर्ज होने और आरोपितों के जेल जाने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफों को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। बाद में ट्रस्ट की ओर से सार्वजनिक रूप से जानकारी दी गई कि दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे प्राप्त हो चुके हैं और उन पर बैठक में विचार किया जाएगा।

ट्रस्ट के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ के अनुसार, अंतिम निर्णय ट्रस्टियों की सामूहिक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

तीन पद हो सकते हैं खाली

यदि दोनों इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं तो ट्रस्ट में कुल तीन पद रिक्त हो जाएंगे। एक पद पहले से ही अयोध्या राजपरिवार के मुखिया रहे बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली पड़ा हुआ है।

इसके अलावा ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ सदस्य बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय भूमिका में नहीं हैं तथा कई बार बैठकों में ऑनलाइन माध्यम से ही शामिल होते हैं। ऐसे में पुनर्गठन की स्थिति में नए चेहरों को भी जिम्मेदारी मिल सकती है।

CEO नियुक्ति से पहले नियमों में करना होगा बदलाव

कानूनी जानकारों के अनुसार, ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति के लिए वर्तमान उपविधियों में संशोधन आवश्यक होगा। मौजूदा नियमावली में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए यदि केंद्र सरकार या ट्रस्ट प्रबंधन सीईओ नियुक्त करने का फैसला करता है तो पहले बायलॉज में बदलाव करना होगा।

अब 11 जुलाई की बैठक को ट्रस्ट के भविष्य और प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है, जहां पुनर्गठन, रिक्त पदों की नियुक्ति और सीईओ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तस्वीर साफ हो सकती है।

 

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