लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘सनातन ही समाजवाद है’ वाले बयान पर अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनके बयान पर कई सवाल खड़े किए हैं।
शादाब चौहान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यादववाद से प्रभावित समाजवाद के नेता अखिलेश यादव यह कह रहे हैं कि ‘सनातन ही समाजवाद है’। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो इसका अर्थ यह होगा कि जो व्यक्ति सनातन में आस्था नहीं रखता, वह समाजवादी नहीं माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव कभी संविधान को दूसरे स्थान पर बताते हैं, जबकि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।
‘संविधान सभी को समान अवसर देता है’
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय संविधान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि देश में भगवा वस्त्र धारण करने वाला व्यक्ति भी मुख्यमंत्री बन सकता है और दाढ़ी-टोपी पहनने वाला या हिजाब पहनने वाली महिला भी मुख्यमंत्री बनने का अधिकार रखती है। उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसा समय भी आएगा जब उत्तर प्रदेश में बिना किसी भेदभाव के न्याय मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कानून व्यवस्था के साथ सभी वर्गों को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित होगी।
‘जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा’
शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की जनता से जुड़े अहम मुद्दों को पीछे छोड़ दिया गया है। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अब यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि कौन बड़ा हिंदू साबित होता है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर अखिलेश यादव गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, मुसलमानों और दलितों पर अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते।