ग्रेटर नोएडा फैक्ट्री अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन: ILJIN Electronics में उत्पादन पर तत्काल रोक, स्ट्रक्चरल ऑडिट के बिना नहीं शुरू होगा काम
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के इकोटेक एक्सटेंशन-3 स्थित ILJIN Electronics India Private Limited में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। संयुक्त जांच में भवन और मशीनरी को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाए जाने के बाद कारखाने में उत्पादन, मशीन संचालन और विद्युत प्रणाली के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत मानव जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।
संयुक्त जांच में सामने आए गंभीर तथ्य
सहायक निदेशक कारखाना एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, फैक्ट्री हेड का लिखित बयान लिया गया और उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों के साथ भवन एवं मशीनरी की तकनीकी स्थिति का परीक्षण किया गया।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 4 अगस्त 2026 को तड़के लगभग 3:10 बजे फैक्ट्री की पहली मंजिल पर स्थित एजिंग टेस्टिंग एरिया में आग लगी थी। सूचना मिलते ही फैक्ट्री प्रबंधन ने कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और अग्निशमन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद दमकल टीमों ने आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
आग से भवन की संरचना को भारी नुकसान
जांच रिपोर्ट के अनुसार भीषण आग के कारण पहली मंजिल पर लगा पीयूएफ रूफिंग सिस्टम, स्टील ट्रस, स्टील बीम, कॉलम और अन्य संरचनात्मक हिस्से अत्यधिक तापमान से गंभीर रूप से प्रभावित हुए। आग के दौरान स्टील संरचना में तापीय प्रसार और आग बुझाने के लिए भारी मात्रा में पानी डाले जाने से तीव्र तापीय संकुचन हुआ, जिससे संरचना में स्थायी तनाव, मुड़ने की स्थिति, भार वहन क्षमता में कमी और अन्य तकनीकी क्षति की आशंका पाई गई।
इसी दौरान भवन की बाहरी ईंट की दीवार अचानक ढह गई, जिसकी चपेट में आग बुझा रहे अग्निशमन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आ गए।
दो दमकल कर्मियों की मौत, कई घायल
इस हादसे में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के दो अधिकारियों और कर्मचारियों की मृत्यु हो गई। वहीं तीन अन्य अग्निशमन कर्मी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार जारी है। इसके अलावा फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी भी गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका इलाज ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में चल रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था में भी मिली खामियां
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि भवन में प्राकृतिक धुआं निकासी की प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। पहली मंजिल से लगातार पानी रिसकर भूतल और बेसमेंट तक पहुंच गया, जिससे विद्युत पैनल, केबल, पीएलसी, सर्वो ड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली और अन्य विद्युत उपकरणों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
जांच टीम ने स्टील संरचना, आरसीसी सदस्यों, नींव और पूरे भवन की संरचनात्मक स्थिरता पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव दर्ज किया। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान स्थिति में भारी मशीनों के संचालन से कंपन उत्पन्न होने पर भवन के आंशिक या पूर्ण रूप से गिरने, दोबारा आग लगने, विद्युत दुर्घटना या अन्य औद्योगिक हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा मंजूरी मिलने तक उत्पादन पर पूरी रोक
जांच में सामने आए तथ्यों, संरचनात्मक क्षति, दो दमकल कर्मियों की मौत और मानव जीवन पर गंभीर खतरे को देखते हुए फैक्ट्री में स्थापित सभी मशीनों, विद्युत प्रणाली और उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
कारखाना प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि किसी मान्यता प्राप्त संस्था से भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट, मशीन रिस्क असेसमेंट, फायर रिस्क असेसमेंट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी असेसमेंट, एनडीटी परीक्षण, फाउंडेशन एनालिसिस, फ्लोर लोड टेस्ट, भूकंपीय विश्लेषण सहित सभी आवश्यक सुरक्षा परीक्षण कराए जाएं। सभी रिपोर्ट और सुरक्षा प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने के बाद ही अनुमति मिलने पर उत्पादन दोबारा शुरू किया जा सकेगा।
उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश या इसके किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किए जाने पर कारखाना अधिभोगी और कारखाना प्रबंधक के खिलाफ कारखाना अधिनियम, 1948 की संबंधित धाराओं के तहत विधिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।