गौतमबुद्धनगर में पोषण और बच्चों की सेहत पर बड़ा अभियान, स्तनपान जागरूकता से लेकर कृमि मुक्ति तक दिया गया विशेष प्रशिक्षण
गौतमबुद्धनगर: जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और बच्चों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गुरुवार को एनआईसी गौतमबुद्धनगर और बाल विकास परियोजना कार्यालय दनकौर में पोषण पाठशाला तथा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्तनपान के महत्व और कृमि संक्रमण से बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ पोषण पाठशाला का प्रसारण
महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस) के निर्देशन तथा निदेशालय लखनऊ के मार्गदर्शन में आयोजित पोषण पाठशाला का प्रसारण वेबकास्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्तनपान विषय पर विशेषज्ञों ने माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की।
स्तनपान के सही तरीके और कुपोषण रोकने पर दिया गया जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान शुरू कराना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने, छह माह के बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण के दौरान कुपोषण की रोकथाम और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में स्तनपान की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को मिला राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का प्रशिक्षण
इसी क्रम में बाल विकास परियोजना कार्यालय दनकौर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के सफल संचालन के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. पूनम और यूनिसेफ से प्रेमपाल ने कृमि संक्रमण के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, संक्रमण की रोकथाम और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों को खिलाने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के बाद एल्बेंडाजोल की गोलियों का किया गया वितरण
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को एल्बेंडाजोल की गोलियों का वितरण किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान पात्र बच्चों तक समय पर दवा पहुंचाकर उन्हें कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखना है।
जागरूकता बढ़ाने और अभियान को प्रभावी बनाने का आह्वान
कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी दनकौर संध्या सोनी, मुख्य सेविकाएं ममता तिवारी, प्रीति, निहारिका, दादरी की मुख्य सेविकाएं चांदनी और विमल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं प्रशिक्षण कार्यक्रम में दनकौर की मुख्य सेविकाएं किरण और माधुरी ने भी भाग लिया। उन्होंने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों से प्रशिक्षण में प्राप्त दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने और प्रत्येक पात्र बच्चे तक एल्बेंडाजोल की दवा पहुंचाने का आह्वान किया।