अतीक का बड़ा बेटा अली पहली बार पैरोल पर जाएगा प्रयागराज, भाई आबान के जनाजे में होगा शामिल; हाईकोर्ट ने दी अनुमति

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झांसी: झांसी जिला कारागार में बंद अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद को पहली बार पैरोल मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे छोटे भाई आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए प्रयागराज जाने की अनुमति दी है। अली को पिछले साल नैनी जेल से झांसी जेल में स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद यह पहला मौका होगा जब वह पैरोल पर जेल से बाहर आएगा।

छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने की मिली अनुमति

गुरुवार को सड़क हादसे में अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान और उसके दोस्त सोनू खान की मौत हो गई थी। शुक्रवार को आबान को सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी और लखनऊ जेल में बंद दोनों भाइयों की पैरोल की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को पैरोल की अनुमति दे दी है। इसके बाद अली करीब एक साल से अधिक समय बाद जेल से बाहर निकलकर प्रयागराज जाएगा और भाई के जनाजे में शामिल होगा।

तन्हाई बैरक में रखा गया है अली

अली अहमद को एक अक्टूबर 2025 की रात कड़ी सुरक्षा के बीच नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जिला कारागार लाया गया था। झांसी जेल पहुंचने के बाद उसकी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। उसे तन्हाई बैरक में रखा गया है।

जेल में अली से मिलने के लिए रिश्तेदारों के आने का सिलसिला भी रहा है। मुलाकातियों की कड़ी जांच के बाद ही उन्हें उससे मिलने की अनुमति दी जाती रही है।

रंगदारी और उमेश पाल हत्याकांड की साजिश का आरोप

अली अहमद पर वर्ष 2022 में प्रॉपर्टी डीलर जीशान से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और चर्चित उमेश पाल हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप हैं। 30 जुलाई 2022 को अली ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उसे नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।

एक अक्टूबर 2025 की रात शासन के आदेश के बाद उसे हाई सिक्योरिटी व्यवस्था के बीच नैनी जेल से झांसी जिला कारागार स्थानांतरित किया गया था।

धूमनगंज थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा

पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और रकम नहीं देने पर घर में घुसकर जानलेवा हमला करने के आरोप में प्रयागराज के धूमनगंज थाने में अली समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। साबिर हुसैन की तहरीर पर पुलिस ने यह मामला दर्ज किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अली और उसके साथियों ने प्रॉपर्टी डीलर जीशान से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। रकम नहीं देने पर उसे कई बार जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया था। इसी मामले में पुलिस ने अली को गिरफ्तार कर नैनी सेंट्रल जेल भेजा था।

बैरक से 1100 रुपये मिलने के बाद बढ़ाई गई थी सुरक्षा

अली को नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी सेल के पास अलग कमरे में रखा गया था। जेल सूत्रों के मुताबिक उससे मुलाकात की अनुमति केवल उसके वकील को थी और मुलाकात सीसीटीवी की निगरानी में होती थी।

16 जून को अली से मिलने उसका वकील जेल पहुंचा था। मुलाकात से पहले अली की तलाशी ली गई और इसके बाद सीसीटीवी कैमरे के सामने मुलाकात कराई गई। अगले दिन जेल अधिकारियों को मामले की जानकारी मिली। इसके बाद बैरक में तलाशी कराई गई, जहां से 1100 रुपये बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद उसकी सुरक्षा और कड़ी करने के निर्देश दिए गए थे।

झांसी जेल में पहले भी रहे हैं मुख्तार और मुन्ना बजरंगी

झांसी जिला कारागार पहले भी कुख्यात अपराधियों को लेकर चर्चा में रहा है। माफिया मुख्तार अंसारी लंबे समय तक इसी जेल में बंद रहा था। वहीं मुन्ना बजरंगी को भी झांसी जेल से बागपत ले जाया गया था, जहां उसकी हत्या कर दी गई थी।

झांसी जिला जेल को संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है। मुख्तार अंसारी की बाद में हार्ट अटैक से मौत हुई थी।

 

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