‘सिर्फ आज नहीं, कल के भारत की सोचिए’, PM मोदी ने अफसरों को दिया बड़ा मंत्र, AI और डेटा पर भी फोकस

0 34

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा, विदेश मामलों और शासन व्यवस्था से जुड़े मंत्रालयों एवं विभागों के भविष्य के एजेंडे पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल तत्काल समस्याओं और मौजूदा चुनौतियों तक सीमित न रहें, बल्कि लंबे समय की सोच के साथ आने वाले वर्षों के भारत की तैयारी पर भी ध्यान दें।

विभागों के बीच साइलो खत्म करने पर जोर

प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों के बीच अलग-अलग ढंग से काम करने की व्यवस्था यानी साइलो की समस्या को खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइलो केवल संगठन से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच से भी जुड़ी होती है। यह समस्या विभागों के बीच ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज, दोनों स्तरों पर हो सकती है।

पीएम मोदी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जवाबदेही लेने और देश के प्रति अपनापन रखते हुए काम करने को कहा। उन्होंने सरकार के कामकाज में ‘पूरी सरकार एक साथ’ वाली सोच अपनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने मिलकर प्रभावी ढंग से काम किया था।

डेटा को बताया भविष्य की राष्ट्रीय संपत्ति

प्रधानमंत्री ने डेटा को देश की राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार डेटा जुटाने, उसे सुरक्षित रखने और उसके प्रबंधन पर काफी संसाधन खर्च करती है, लेकिन विभागों के बीच तालमेल की कमी और अलग-अलग प्रणालियों के कारण इसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग उद्देश्यों के लिए डेटा जुटाने और उसके प्रबंधन के तरीके भी अलग-अलग हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे विभिन्न विभागों की डेटा प्रणालियां आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकें और उपलब्ध जानकारी का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सके।

AI के इस्तेमाल के साथ मानवीय समझ भी जरूरी

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के बेहतर इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि AI की क्षमताओं को मानवीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाना चाहिए, लेकिन फैसले लेने में इंसानी समझ और हस्तक्षेप जरूरी है।

पीएम मोदी ने अधिकारियों से सरकारी कामकाज में AI के इस्तेमाल के नए और रचनात्मक तरीकों पर विचार करने को कहा। उन्होंने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत भी बताई। प्रधानमंत्री के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और युवाओं के साथ व्यापक जुड़ाव से नीति निर्माण में नए और पारंपरिक सोच से अलग विचार सामने आ सकते हैं।

रक्षा उद्योग और समुद्री क्षेत्र पर भी मंथन

प्रधानमंत्री ने भारत के रक्षा उद्योग को और मजबूत करने तथा उसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में नए और आधुनिक पाठ्यक्रम विकसित करने और इस क्षेत्र के लिए बेहतर मानव संसाधन तैयार करने की आवश्यकता भी बताई।

बैठक में देश के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाज निर्माण को पहले ही बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों से यह देखने को कहा कि इससे जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति हो रही है या नहीं और इस काम को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए।

वरिष्ठ और जूनियर अधिकारियों के बीच संवाद बढ़ाने की सलाह

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और टीम भावना मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से जूनियर अधिकारियों के साथ ज्यादा व्यक्तिगत और अनौपचारिक संवाद करने को कहा।

उन्होंने अलग-अलग कैडर और विभागों के अधिकारियों के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि सरकार के विभिन्न हिस्से आपसी समन्वय के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सचिवों ने अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताओं, नई चुनौतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं पर अपने अनुभव साझा किए।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.