नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की तेज आर्थिक वृद्धि के बीच लोगों से स्वदेशी, स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने खास तौर पर विदेशों में शादियां करने के चलन पर सवाल उठाते हुए लोगों से ‘भारत में शादी’ का मंत्र अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि शादी करनी है तो विदेश के बजाय भारत में ही आयोजन किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि केवल घूमने-फिरने के लिए विदेश यात्राओं से बचना चाहिए और विदेशों में शादियां करने के बजाय देश में ही शादी समारोह आयोजित करने चाहिए। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल और घरेलू खर्च को प्राथमिकता देने की भी अपील की।
क्यों जरूरी है भारत में शादी का मंत्र?
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत को देश की आर्थिक मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि घरेलू उत्पादों और स्थानीय उपभोग को जितना अधिक बढ़ावा मिलेगा, देश उतना ही मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगा।
विदेश में शादी समारोह आयोजित होने पर भारतीयों का बड़ा खर्च दूसरे देशों में होता है। इसके विपरीत भारत में शादी होने से होटल, खानपान, सजावट, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े घरेलू कारोबार को फायदा मिल सकता है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री ने लोगों से भारत में शादी करने का आग्रह किया है।
विदेशों में भारतीय शादियों का बढ़ता चलन
विदेश में भारतीयों की शादियां अब केवल बेहद संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में सर्वे किए गए हर चार विवाहों में करीब एक डेस्टिनेशन वेडिंग था, जिसमें देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित समारोह दोनों शामिल थे।
रिपोर्टों में बताया गया कि 2025 में विदेश में आयोजित डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत बजट करीब 1.5 करोड़ रुपये था, जबकि भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत बजट करीब 58 लाख रुपये रहा।
थाईलैंड भारतीयों के लिए प्रमुख विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन में शामिल रहा, जबकि 2025 में श्रीलंका की लोकप्रियता में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई। यात्रा बीमा के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय शादियों से जुड़े यात्रा बीमा की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, विदेशों में होने वाली भारतीय शादियों की कुल संख्या का कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। कुछ उद्योग अनुमानों में हर साल करीब 1,000 भारतीय शादियों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने की बात कही गई है।
सोना खरीदने से बचने की भी अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से यह भी कहा कि जब तक बहुत जरूरी न हो, सोना खरीदने से बचना चाहिए। उन्होंने घरेलू उत्पादों और स्थानीय खपत को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
पीएम मोदी के मुताबिक, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने से देश की आर्थिक शक्ति मजबूत होगी और भारत को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
7.8 फीसदी जीडीपी वृद्धि के बीच आया संदेश
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने इस प्रदर्शन को देशवासियों की मेहनत और सामूहिक शक्ति का प्रतिबिंब बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया युद्ध, संकट और प्रभावित आपूर्ति श्रृंखला जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन इसके बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं को पार करते हुए देश ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है और इस रफ्तार को बनाए रखना जरूरी है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर अधिक जोर देने से भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आज की मेहनत और सामूहिक प्रयासों के जरिए देश की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा किया जा सकता है।
भारत की वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये अनुमानित की गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये थी। इसके आधार पर वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
इसी अवधि में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन में भी 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी जीडीपी के आंकड़ों का स्वागत करते हुए इसके लिए देश की जनता की मेहनत को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधार और अर्थव्यवस्था के प्रबंधन के परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं।