जब आंकड़ों ने बताई बदलाव की कहानी: गौतमबुद्धनगर में 18,364 बच्चों ने कुपोषण को पीछे छोड़ा

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गौतमबुद्धनगर: कभी किसी बच्चे का कम वजन सिर्फ एक संख्या नहीं होता। उसके पीछे उसकी सेहत, उसका विकास और उसके बेहतर भविष्य की चिंता जुड़ी होती है। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, गौतमबुद्धनगर की जमीनी कार्यवाही ने जिले में बदलाव की एक उल्लेखनीय कहानी लिखी है।

पिछले एक वर्ष में 18,364 बच्चे कुपोषण की श्रेणी से निकलकर सामान्य श्रेणी में पहुंच चुके हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 18,364 बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और हजारों परिवारों के चेहरे पर आई राहत की कहानी है।

शुरुआत हुई पहचान से

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में सबसे पहला कदम है—समस्या की सही समय पर पहचान। गौतमबुद्धनगर में आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर की नियमित निगरानी की जा रही है। चिन्हित बच्चों पर विशेष ध्यान दिया गया और उनके अभिभावकों को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने परिवारों से निरंतर संवाद करते हुए बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए उन्हें जागरूक किया। इस निरंतर निगरानी और सहभागिता ने धीरे-धीरे बदलाव की तस्वीर बदलनी शुरू की।

और फिर बदली तस्वीर

एक वर्ष के प्रयासों के बाद परिणाम सामने है

3,827 अति-कुपोषित (SAM) बच्चे सामान्य श्रेणी में पहुंचे।

14,537 कुपोषित (MAM) बच्चे सामान्य श्रेणी में पहुंचे।

यानी कुल 18,364 बच्चों ने कुपोषण की श्रेणी को पीछे छोड़ते हुए सामान्य श्रेणी में जगह बनाई।

यह बदलाव एक दिन में नहीं आया। इसके पीछे नियमित निगरानी, पोषण संबंधी परामर्श, अभिभावकों की जागरूकता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की लगातार मेहनत शामिल रही।

1,108 केंद्र, हजारों बच्चों की निगरानी

इस पूरी व्यवस्था की पहुंच को मजबूत बनाने में जिले के 1,108 आंगनवाड़ी केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की 5 परियोजनाओं के अंतर्गत संचालित इन केंद्रों पर 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 81,159 बच्चों के पोषण स्तर की नियमित निगरानी की जा रही है।

हर चिन्हित बच्चे को केवल एक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है—समय पर पहचान, लगातार निगरानी और बेहतर पोषण की दिशा में निरंतर प्रयास।

बदलाव की असली तस्वीर

पिछले एक वर्ष में 18,364 बच्चों का सामान्य श्रेणी में आना यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव तब और मजबूत होता है, जब वे जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी और परिवारों की सहभागिता से जुड़ती हैं।

प्रदेश सरकार की पोषण-केंद्रित पहल को बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों ने गौतमबुद्धनगर में एक सकारात्मक परिणाम में बदला है।

यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

क्योंकि लक्ष्य केवल कुपोषण से बाहर लाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को स्वस्थ, सक्रिय और सुपोषित बचपन देना है।

18,364 बच्चे। एक बड़ा बदलाव। एक स्वस्थ भविष्य की शुरुआत।

कुपोषण से सुपोषण की ओर बढ़ता गौतमबुद्धनगर
स्वस्थ बचपन से सशक्त उत्तर प्रदेश की ओर।

 

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