कौन हैं CBI अफसर सीमा पाहुजा? अब दिशा सालियान डेथ केस की जांच की कमान, हाथरस-RG कर जैसे मामलों में रही अहम भूमिका
मुंबई: एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला छह साल बाद एक बार फिर चर्चा में है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सीबीआई की तेज-तर्रार अफसर सीमा पाहुजा इस मामले की जांच की निगरानी करेंगी। हालांकि, एफआईआर में अभी किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।
सीमा पाहुजा कौन हैं?
सीमा पाहुजा फिलहाल दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम्स यूनिट में एसपी के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट में भी काम कर चुकी हैं। उनके करियर में कई संवेदनशील और चर्चित आपराधिक मामलों की जांच शामिल रही है।
सीमा पाहुजा हाथरस कांड, उन्नाव रेप केस और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़े रेप-मर्डर केस की जांच से जुड़ी रही हैं। इसके अलावा शिमला के चर्चित ‘गुड़िया’ रेप-मर्डर केस में भी उनकी भूमिका रही थी।
शिमला के गुड़िया मामले की जांच के दौरान उनकी टीम ने आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल किया था। इस काम के लिए टीम की सराहना भी हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, साल 2021 में सीमा पाहुजा को बेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर का गोल्ड मेडल भी मिला था।
अब दिशा सालियान केस की जांच पर नजर
सीबीआई ने दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। एजेंसी अब मामले से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेजों और उपलब्ध सबूतों की दोबारा जांच करेगी। जांच के शुरुआती दौर में उन लोगों के बयान लिए जाने की बात सामने आई है, जो 8 जून 2020 की रात दिशा की मौत से पहले उनके मंगेतर रोहन रॉय के घर हुई पार्टी में मौजूद थे।
जांच एजेंसी उस समय की पुलिस जांच से जुड़े रिकॉर्ड, घटनास्थल से संबंधित दस्तावेज, फोरेंसिक सामग्री और दूसरे उपलब्ध सबूतों को भी खंगालेगी। छह साल से ज्यादा पुराने मामले में इन सभी रिकॉर्ड और सबूतों की दोबारा पड़ताल जांच का अहम हिस्सा होगी।
छह साल पुराने मामले में CBI के सामने बड़ी चुनौती
दिशा सालियान की मौत को छह साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। ऐसे में पुराने सबूतों और रिकॉर्ड को दोबारा जुटाना और उस समय मौजूद गवाहों से जानकारी हासिल करना सीबीआई के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी। एजेंसी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
सीबीआई की एफआईआर में कई लोगों के नाम और आरोपों का जिक्र किया गया है, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार एफआईआर में किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं माना गया है। किसी व्यक्ति की भूमिका जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर तय की जाएगी।
अब निगाहें सीमा पाहुजा की निगरानी में होने वाली सीबीआई जांच पर हैं। जांच एजेंसी छह साल पुराने इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल के जरिए आगे बढ़ेगी।