TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक, ममता बनर्जी गुट को झटका; कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद TMC से जुड़े दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले की आलोचना की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘लेट नाइट बर्थडे गिफ्ट’ बताया।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि TMC के नाम और चुनाव चिह्न को रोकने का फैसला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी के गुट को चुनाव चिह्न बहाल करने की मांग की।

TMC पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों में विवाद

TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चल रहा है। जुलाई में दोनों पक्षों ने पार्टी पर नियंत्रण का दावा किया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

12 सितंबर को दोनों पक्षों की सुनवाई हुई थी और 16 सितंबर को अंतिम दलीलें पेश करने को कहा गया था। फिलहाल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को लेकर विवाद का अंतिम समाधान नहीं हुआ है।

6 अक्टूबर को होंगे नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव

चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को TMC के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। अब उपचुनाव में दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।

 

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