चार श्रम संहिताओं से कारोबार करना होगा आसान? ट्रेड शो में अनिल राजभर बोले- श्रमिक हितों के साथ उद्योगों की जरूरतों का भी रखा जाएगा ध्यान
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश और प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के हितों की रक्षा करने के साथ उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है। उन्होंने कहा कि श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए दोनों के हित और भविष्य को ध्यान में रखकर नीतियां और फैसले लिए जा रहे हैं।
अनिल राजभर सोमवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चौथे दिन आयोजित ‘विशेष श्रम संहिताएं’ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
दो साल से नए कारखानों के पंजीकरण में यूपी पहले स्थान पर
श्रम मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार दो वर्षों से देश में नए कारखानों के पंजीकरण के मामले में पहले स्थान पर है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयासों का संकेत है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया, कनेक्टिविटी में सुधार हुआ और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के साथ उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
श्रमिक और उद्योग दोनों के हितों में संतुलन पर जोर
अनिल राजभर ने कहा कि सरकार के सामने हमेशा यह चुनौती रही है कि श्रमिकों के हितों को प्रभावित किए बिना उद्योग जगत का मनोबल बनाए रखा जाए। इसी वजह से श्रमिकों और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों के बिना श्रमिकों और श्रमिकों के बिना उद्योगों की कल्पना नहीं की जा सकती। ऐसे में दोनों के हित, भावनाएं और भविष्य ध्यान में रखते हुए नीतिगत फैसले लेना जरूरी है।
श्रम कानूनों को सरल बनाने की दिशा में कदम
श्रम मंत्री ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रम कानूनों में सुधार और सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने इन संहिताओं को लेकर विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद किया है और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी विचार-विमर्श किया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार ने उद्योग जगत के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं। किसी उद्योग को समस्या होने या सरकारी सहयोग की आवश्यकता होने पर विभागीय अधिकारी और सरकार उसके समाधान के लिए उपलब्ध हैं।
निवेशकों के सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
अनिल राजभर ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति और आज विकास के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। इस परिवर्तन में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने निवेशकों और उद्यमियों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश के विकास का लक्ष्य उद्योग जगत की सहभागिता के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां बढ़ेंगी। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत के बीच लगातार संवाद, सहयोग और समन्वय के जरिए प्रदेश को विकास के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ाया जाएगा।
सिंगल विंडो व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी
अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन आशीष कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप चार श्रम संहिताओं के जरिए पुराने कई श्रम कानूनों को समाहित कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत लंबे समय से श्रम कानूनों की जटिलता और अधिक संख्या के कारण अनुपालन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने की मांग करता रहा है। चारों संहिताओं के जरिए श्रम कानूनों को व्यवस्थित किया गया है। उत्तर प्रदेश में इनसे संबंधित अधिकांश नियमावलियां जारी हो चुकी हैं।
गोयल ने बताया कि उद्योगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों से संबंधित आवेदन एक ही पोर्टल के माध्यम से किए जा सकेंगे। इससे उद्योगों का समय बचाने और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों के हितों में संतुलन बनाते हुए श्रमिकों की सुरक्षा और उद्योगों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रदेशभर में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी और औद्योगिक क्षेत्रों में इनके प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
चार संहिताओं में श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
श्रमायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि सत्र का उद्देश्य उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ श्रमिक सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि पुराने श्रम कानूनों को समाहित करते हुए वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता लागू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। संहिताओं के जरिए मल्टीपल रजिस्ट्रेशन से राहत और सिंगल विंडो व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना, श्रमिकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना भी इसका हिस्सा है।
सौम्या अग्रवाल ने कहा कि व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के साथ महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण और समान अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल श्रम संहिताएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। विभाग ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें उद्योगों का विकास हो और श्रमिकों के अधिकार एवं कल्याण भी संरक्षित रहें।
कार्यक्रम में श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव आशीष कुमार गोयल, श्रम आयुक्त सौम्या अग्रवाल समेत गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र के श्रम विभाग के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।