यूपी चुनाव में अखिलेश यादव की बढ़ सकती है मुश्किल, ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद के तीसरे मोर्चे की चर्चा तेज

0 22

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे राजनीतिक मोर्चे की संभावनाएं तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के इंडिया गठबंधन के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ आने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि यह समीकरण आकार लेता है, तो खासकर मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाली सीटों पर समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।

ओवैसी की हालिया सभाओं में सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। वहीं, इंडिया गठबंधन में जगह नहीं मिलने की स्थिति में छोटे दलों के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद के साथ नजर आने वाला एक वीडियो वायरल होने के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।

मुस्लिम बहुल सीटों पर एआईएमआईएम की नजर

एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में उन विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को उम्मीदवार घोषित कर चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद श्रावस्ती की भिनगा सीट से भी प्रत्याशी घोषित किया गया।

ओवैसी ने 11 अक्टूबर को आजमगढ़ और 18 अक्टूबर को रामपुर में सभाएं कर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश की। इन कार्यक्रमों में उनके निशाने पर समाजवादी पार्टी रही। रामपुर में उन्होंने आजम खान की तारीफ करते हुए अखिलेश यादव पर सवाल उठाए।

इसके बाद अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान और बाद में उनके परिवार से मुलाकात की। इसे ओवैसी के हमलों के बीच सपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा गया। रविवार को शामली में आयोजित सभा में भी ओवैसी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

निकाय चुनाव की सफलता दोहराने की कोशिश

एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों के प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में दोहराना चाहती है। पार्टी के मुताबिक, निकाय चुनाव में उसके पांच नगर पालिका अध्यक्ष और 83 सभासद व पार्षद चुने गए थे। संभल और सिकंदराराऊ में पार्टी उम्मीदवारों की जीत को भी संगठन अपनी उपलब्धि के रूप में देख रहा है।

पार्टी अब बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश में जुटी है। उसकी नजर कानपुर की सीसामऊ और कैंट, प्रयागराज पश्चिम, सहारनपुर, रामपुर, अमरोहा और मेरठ कैंट जैसी सीटों पर है, जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव अहम माना जाता है।

वायरल वीडियो से गठबंधन की अटकलें तेज

तीसरे मोर्चे की चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें असदुद्दीन ओवैसी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर तथा आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद साथ दिखाई दे रहे हैं।

सपा ने वीडियो के जरिए इन नेताओं पर अपने-अपने समाज के वोटों को लेकर राजनीतिक सौदेबाजी करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने सपा पर बीजेपी के साथ होने का आरोप लगाया। हालांकि, वीडियो के आधार पर किसी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद ओवैसी और चंद्रशेखर के संभावित साथ आने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

40 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है एआईएमआईएम

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, यदि ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद के बीच गठबंधन होता है, तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में करीब 40 से 45 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। बाकी सीटों पर चंद्रशेखर की पार्टी और दूसरे छोटे दल चुनाव लड़ सकते हैं।

इस संभावित गठबंधन की रणनीति दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एक साथ लाने की हो सकती है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी लगभग 19 प्रतिशत मानी जाती है। हालांकि, इन दोनों वर्गों का समर्थन किसी एक गठबंधन को कितना मिलेगा, यह चुनावी परिस्थितियों और स्थानीय उम्मीदवारों पर निर्भर करेगा।

पहले भी गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ चुके हैं ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के जरिए चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने भागीदारी परिवर्तन मोर्चा बनाया था, जिसमें बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी भी शामिल थी।

वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने पल्लवी पटेल के अपना दल कमेरावादी के साथ पीडीएम न्याय मोर्चा बनाया था। हालांकि, दोनों चुनावों में इन गठबंधनों को कोई सीट नहीं मिली। अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे की संभावनाओं के बीच यह देखना अहम होगा कि ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद वास्तव में साथ आते हैं या नहीं।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.