करवा चौथ 29 अक्टूबर को, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं न हों भ्रमित; जम्मू में रात 8:25 बजे दिख सकता है चांद

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जम्मू: करवा चौथ का व्रत इस वर्ष 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ यह व्रत रखेंगी। जो महिलाएं पहली बार करवा चौथ का व्रत शुरू करना चाहती हैं, वे भी इस बार व्रत रख सकती हैं। हालांकि, ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शुक्र के बाल्यत्व के कारण इस वर्ष व्रत का उद्यापन नहीं किया जाएगा।

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष और ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं निर्जल उपवास रखकर भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और चंद्रदेव की पूजा करती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनने और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।

करवा चौथ 2026 का शुभ मुहूर्त

महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक, पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की देर रात 1:07 बजे शुरू होगी और 29 अक्टूबर की रात 10:11 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा।

  • करवा चौथ की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
  • पूजन का शुभ समय: शाम 5:38 बजे से 7:05 बजे तक
  • जम्मू में चंद्र दर्शन का संभावित समय: रात 8:25 बजे

चंद्रोदय का समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अन्य शहरों में रहने वाली महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्र दर्शन का समय देख सकती हैं।

पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं दूर करें यह भ्रम

करवा चौथ का व्रत पहली बार रखने की तैयारी कर रही महिलाओं के बीच इस साल व्रत शुरू करने को लेकर भ्रम की स्थिति है। महंत रोहित शास्त्री ने स्पष्ट किया कि पहली बार व्रत रखने की इच्छुक महिलाएं 29 अक्टूबर को विधि-विधान के साथ करवा चौथ कर सकती हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष शुक्र के बाल्यत्व के कारण उद्यापन नहीं किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, कुछ महिलाएं 12 या 16 वर्षों तक व्रत रखने के बाद उद्यापन करती हैं, जबकि कई महिलाएं इसे जीवनभर जारी रखती हैं। ऐसे में पहली बार व्रत शुरू करने और उद्यापन करने की परंपरा को अलग-अलग समझना जरूरी है।

सरगी से शुरू होता है करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करके व्रत की शुरुआत करती हैं। जम्मू क्षेत्र में सरगी में फैनी, कतलमे, नारियल, दूध, रबड़ी और मीठी कचौरी जैसी पारंपरिक चीजें शामिल की जाती हैं। सरगी के बाद महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को पूजा की तैयारी करती हैं।

पूजन के दौरान करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाया जाता है। इसके बाद गेहूं, बूरा, मिठाई, फूल, दीपक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की पूजा कर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनने की भी परंपरा है।

चंद्र दर्शन के बाद इस तरह खोलती हैं व्रत

करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। रात में चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं उन्हें अर्घ्य देती हैं। पारंपरिक रीति के अनुसार, छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

जम्मू सहित देश के कई राज्यों में करवा चौथ को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहता है। इस अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।

 

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