‘जिस परिवार को 10 साल घर में रखा, उसी ने उजाड़ दिया वंश’, लखनऊ तिहरे हत्याकांड से टूट गया तीन पीढ़ियों का रिश्ता

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लखनऊ: नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में हुए तिहरे हत्याकांड ने एक परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। जिन लोगों को करीब 50 साल पहले उनके पूर्वजों ने रहने के लिए जगह दी थी, जिनके साथ तीन पीढ़ियों तक पारिवारिक रिश्ते निभाए गए, उन्हीं पर परिवार के तीन सदस्यों की हत्या का आरोप है। पीड़ित परिवार के स्वजन का कहना है कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिस परिवार को अपनेपन के साथ सहारा दिया, वही एक दिन उनका वंश उजाड़ देगा।

दोनों परिवारों के बीच रिश्ते इतने गहरे थे कि बच्चे एक-दूसरे के माता-पिता को चाचा और चाची कहकर बुलाते थे। घरों के बीच आना-जाना था और रसोई तक साझा अपनापन था। लेकिन बरगद के पेड़ के पास कुछ कदम जमीन पर कार खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि छह महीने के भीतर वर्षों पुराने रिश्ते टूट गए। इस तिहरे हत्याकांड में शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू और शिवेंद्र के बेटे सुयश तिवारी की जान चली गई।

50 साल पहले पूर्वजों ने दी थी रहने की जगह

मृतकों के स्वजन के मुताबिक, करीब पांच दशक पहले शिवाजी तिवारी के पिता चंद्रभान तिवारी ने आरोपित परिवार को कॉलोनी में रहने के लिए जगह दी थी। परिवार को केवल पनाह ही नहीं दी गई, बल्कि करीब 10 साल तक बिना किराया लिए घर में रहने दिया गया। इसके अलावा आरोपित परिवार के तत्कालीन मुखिया डीके शुक्ला को हरदोई की कॉटन मिल में नौकरी दिलाने में भी मदद की गई थी।

शिवाजी तिवारी के फुफेरे भाई मनोज अवस्थी ने तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार किया। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय तक गहरे संबंध रहे, लेकिन बीते छह महीने में हालात पूरी तरह बदल गए। मनोज के मुताबिक, इस घटना में परिवार ने अपने तीन सदस्यों को खो दिया और अब शिवाजी के परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा है।

परिवार में अब तीन महिलाएं ही बचीं

तिहरे हत्याकांड के बाद परिवार में शिवाजी तिवारी की पत्नी ऊषा तिवारी, शिवेंद्र तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी और शिवेंद्र की बेटी सुमेधा ही बची हैं। तीन पुरुष सदस्यों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्वजन का कहना है कि वर्षों तक चले पारिवारिक अपनत्व का इस तरह अंत होने की उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।

सुयश और ऋषभ बचपन से थे अच्छे दोस्त

इस घटना की एक और दर्दनाक बात यह है कि सुयश और ऋषभ बचपन से ही अच्छे दोस्त थे। दोनों सीएमएस अशरफाबाद में पढ़ते थे। ऋषभ सुयश से एक कक्षा आगे था, लेकिन इसके बावजूद दोनों की दोस्ती काफी गहरी थी।

दोनों एक ही रिक्शे से स्कूल आते-जाते थे। छुट्टी के बाद साथ खेलते और मेले व बाजार भी एक साथ जाते थे। दोनों परिवारों की महिलाओं के बीच भी अच्छी दोस्ती थी। ऐसे में वर्षों पुराने रिश्तों के बीच उपजे विवाद और उसके बाद हुई इस घटना ने परिवार के साथ आसपास के लोगों को भी सदमे में डाल दिया है।

 

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