ढाई साल पहले से शुरू कर दी थी तैयारी
समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के लिए इस बार काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। अखिलेश यादव ने करीब ढाई वर्ष पहले ही प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए थे, ताकि उन्हें अपने-अपने जिलों में संगठन मजबूत करने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने का पर्याप्त समय मिल सके।
पार्टी ने तैयारी के लिए तीन स्तरों पर व्यवस्था बनाई। सबसे पहले जिला संगठनों को प्रचार और मतदाता बनाने की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद विधायकों, सांसदों और पूर्व विधायकों-सांसदों की टीमों को भी इस काम में लगाया गया। अखिलेश यादव समय-समय पर बैठकों के जरिए तैयारियों की समीक्षा करते रहे।
पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में भी पहले से तैयारी की और जीत की संभावना वाले प्रत्याशियों पर दांव लगाया। चुनाव परिणामों के बाद सपा विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने में सफल रही और सदन में उसका संख्या बल भी बढ़ा।
मतगणना और प्रशासनिक चुनौतियों के लिए भी बनाई योजना
सपा के पूर्व एमएलसी उदयवीर सिंह के मुताबिक, पार्टी ने चुनाव के दौरान पैदा होने वाली संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले ही योजना तैयार कर ली थी। इसमें पुलिस-प्रशासन के दबाव, मतगणना में देरी और कथित गड़बड़ियों जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी शामिल थी।
उदयवीर सिंह ने बताया कि वाराणसी में मतगणना में देरी होने पर पार्टी के 500-500 कार्यकर्ताओं को बारी-बारी से मुस्तैद रखा गया। पार्टी के मुताबिक, पहले से बनाई गई रणनीति और कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने चुनाव में उसकी स्थिति मजबूत करने में मदद की। नतीजों के समय सपा तीन सीटों पर जीत से आगे बढ़कर चार सीटें जीतने में सफल रही, जबकि एक अन्य सीट पर भी उसकी दावेदारी मजबूत बताई गई।
जीत के बाद भाजपा पर अखिलेश यादव के हमले तेज
एमएलसी चुनाव में सफलता के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आगरा में मतदान केंद्र के भीतर मारपीट, गोरखपुर में हुए विवाद और वाराणसी में पर्यवेक्षक के खिलाफ भाजपा के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि गुंडागर्दी, बेईमानी, चोरी और धांधली भाजपा की पहचान बन चुकी है। उनका दावा था कि इन तरीकों के बिना भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती। ये आरोप सपा अध्यक्ष ने चुनाव परिणामों के बाद लगाए हैं।
गोरखपुर में ‘हाता नहीं भाता’ का मुद्दा उठाया
अखिलेश यादव ने गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतगणना में कथित गड़बड़ी के जरिए उन्हें हराने की कोशिश की गई। अखिलेश ने इसके पीछे ‘हाता नहीं भाता’ को प्रमुख कारण बताया।
गोरखपुर में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के आवास को ‘हाता’ कहा जाता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ हुआ व्यवहार राजनीतिक कारणों से जुड़ा है। हालांकि, मतगणना में गड़बड़ी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘भाजपा वोट से नहीं, खोट से जीतती है’
अखिलेश यादव ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी वोट से नहीं, बल्कि कथित खोट से जीतती है। उन्होंने गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए।
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के नवनिर्वाचित सदस्य डॉ. आकाश अग्रवाल का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि चुनाव के दौरान उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को शिक्षक समाज नहीं भूलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को भाजपा में सम्मान नहीं मिला। ये बयान सपा अध्यक्ष ने चुनाव के बाद भाजपा पर हमला बोलते हुए दिए।
अग्रहरि समाज को लेकर भी भाजपा पर निशाना
अखिलेश यादव ने डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर अग्रहरि समाज की भावनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज के लोग खुद को आहत और अपमानित महसूस कर रहे हैं।
अखिलेश ने अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े राजनीतिक अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें ‘ए’ का अर्थ अब अग्रवाल और अग्रवंशी समाज से भी है। उन्होंने इसे भाजपा और पीडीए के बीच व्यापक राजनीतिक मुकाबले के रूप में पेश किया।
2027 के लिए सपा को मिली नई ऊर्जा
विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने सपा को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। समय रहते प्रत्याशियों का चयन, जिलों में मतदाता बनाने पर जोर और लगातार समीक्षा पार्टी की चुनावी रणनीति के अहम हिस्से रहे। वहीं, चुनाव के दौरान कथित गड़बड़ियों को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों ने भाजपा के साथ राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।