MLC के पास कितनी होती है पावर? कितनी मिलती है सैलरी, सरकारी आवास से पेंशन तक जानें सभी सुविधाएं

0 23

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद एमएलसी यानी विधान परिषद सदस्य की भूमिका, अधिकारों और सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। एमएलसी का नाम आपने कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उसे कौन चुनता है, उसके पास कितनी शक्तियां होती हैं और उसे हर महीने कितनी सैलरी मिलती है? क्या एमएलसी मुख्यमंत्री या मंत्री भी बन सकता है? इसके अलावा उसे सरकारी आवास, यात्रा भत्ता, चिकित्सा सुविधा और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं या नहीं? आइए, इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।

MLC क्या होता है?

MLC का पूरा नाम मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव काउंसिल है। हिंदी में इसे विधान परिषद का सदस्य कहा जाता है। भारत में राज्य स्तर पर कुछ राज्यों में दो सदनों वाली विधायिका है। इसमें विधानसभा निचला सदन और विधान परिषद उच्च सदन होती है। विधानसभा के सदस्यों को विधायक यानी एमएलए कहा जाता है, जबकि विधान परिषद के सदस्य एमएलसी कहलाते हैं।

विधायक सीधे जनता के मतदान से चुने जाते हैं, लेकिन विधान परिषद के सभी सदस्यों का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। कुछ सदस्य स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, शिक्षकों और स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। कुछ का चुनाव विधायक करते हैं, जबकि कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

विधान परिषद का उद्देश्य कानून बनाने की प्रक्रिया में अतिरिक्त विचार-विमर्श करना और शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, कला तथा समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देना भी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधान परिषद है।

MLC के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं?

एमएलसी के अधिकारों को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। विधान परिषद का सदस्य कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग ले सकता है, सरकार से सवाल पूछ सकता है और राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस कर सकता है। हालांकि, उसकी शक्तियां हर मामले में विधानसभा के सदस्य के समान नहीं होतीं।

कानून बनाने में भूमिका

विधान परिषद वाले राज्यों में सामान्य विधेयक विधानसभा या विधान परिषद में पेश किया जा सकता है। हालांकि, किसी विधेयक को कानून बनाने की प्रक्रिया में दोनों सदनों की भूमिका और संविधान के नियम महत्वपूर्ण होते हैं। विधान परिषद सामान्य विधेयकों पर चर्चा कर सकती है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनमें बदलाव या सिफारिशों से जुड़ी भूमिका निभा सकती है।

सरकार से सवाल पूछने का अधिकार

एमएलसी सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्रियों से सवाल पूछ सकता है। वह राज्य सरकार की नीतियों, योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और जनहित से जुड़े मामलों पर जवाब मांग सकता है। इसके जरिए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और जवाबदेही तय करने में उसकी भूमिका होती है।

जनता की समस्याएं सदन में उठा सकता है

एमएलसी अपने निर्वाचन क्षेत्र या व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दों को विधान परिषद में उठा सकता है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, बिजली, किसानों की समस्याएं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। स्थानीय निकायों, शिक्षकों और स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए सदस्य अपने संबंधित वर्गों की समस्याओं को भी सदन में रख सकते हैं।

बजट पर चर्चा, लेकिन धन विधेयक में सीमित अधिकार

विधान परिषद का सदस्य राज्य के बजट पर चर्चा कर सकता है और सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठा सकता है। हालांकि, धन विधेयक यानी मनी बिल के मामले में विधान परिषद की शक्तियां सीमित हैं। धन विधेयक केवल विधानसभा में पेश किया जा सकता है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे विधान परिषद के पास भेजा जाता है। परिषद अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें दे सकती है, लेकिन विधानसभा उन सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होती।

क्या MLC मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है?

हां, विधान परिषद का सदस्य मुख्यमंत्री या राज्य सरकार में मंत्री बन सकता है। संविधान के तहत मुख्यमंत्री या मंत्री बनने के लिए केवल विधानसभा का सदस्य होना अनिवार्य नहीं है। किसी राज्य में विधान परिषद का सदस्य भी मुख्यमंत्री या मंत्री नियुक्त किया जा सकता है। हालांकि, मंत्रिपरिषद के सदस्य को संविधान में निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है।

MLC को कितनी सैलरी मिलती है?

एमएलसी की सैलरी पूरे देश में एक समान नहीं है। इसका निर्धारण संबंधित राज्य के कानूनों और नियमों के अनुसार होता है। इसलिए उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सदस्यों को मिलने वाले वेतन और भत्तों में अंतर हो सकता है।

एमएलसी की आमदनी को समझने के लिए तीन बातों में अंतर करना जरूरी है। पहली, मूल वेतन यानी पद के लिए निर्धारित मासिक राशि। दूसरी, निर्वाचन क्षेत्र, कार्यालय, यात्रा, संचार और अन्य निर्धारित कार्यों के लिए मिलने वाले भत्ते। तीसरी, सरकारी आवास, चिकित्सा और यात्रा जैसी सुविधाएं। इन सभी को जोड़ने पर कुल लाभ मूल वेतन से अधिक हो सकता है, लेकिन हर भत्ता सीधे नकद आय नहीं होता। कुछ राशि वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है और उस पर निर्धारित शर्तें लागू होती हैं।

उत्तर प्रदेश में MLC को हर महीने कितनी रकम मिलती है?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के सदस्य को मूल वेतन और विभिन्न भत्तों को मिलाकर लगभग 2.66 लाख रुपये प्रति माह मिलने का आंकड़ा बताया जाता है। इसमें मूल वेतन 35,000 रुपये बताया गया है। हालांकि, कुल रकम में अलग-अलग मदों के भत्ते शामिल होते हैं। वास्तविक भुगतान और पात्रता संबंधित नियमों तथा लागू दरों पर निर्भर कर सकती है।

MLC को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?

वेतन के अलावा विधान परिषद के सदस्यों को सरकारी कामकाज के लिए कई सुविधाएं मिल सकती हैं। इनका स्वरूप और सीमा राज्य के नियमों के अनुसार तय होती है।

सरकारी आवास: कुछ राज्यों में सदस्यों को राजधानी में सरकारी आवास, विधायक निवास या निर्धारित आवास भत्ता दिया जाता है। यह सुविधा हर राज्य में एक जैसी नहीं होती और इसकी पात्रता संबंधित नियमों पर निर्भर करती है।

यात्रा भत्ता: सदन की बैठकों, समिति की बैठकों और आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा भत्ता या खर्च की प्रतिपूर्ति मिल सकती है। कुछ राज्यों में यात्रा की दूरी, श्रेणी और उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग दरें लागू होती हैं।

चिकित्सा सुविधा: राज्य के नियमों के अनुसार सदस्यों को सरकारी अस्पतालों में इलाज, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति या अन्य निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। परिवार के सदस्यों को मिलने वाली सुविधाएं भी संबंधित नियमों पर निर्भर करती हैं।

पेंशन: विधान परिषद के पूर्व सदस्यों को पेंशन मिल सकती है। इसकी राशि, पात्रता और अन्य शर्तें संबंधित राज्य के कानूनों के अनुसार तय होती हैं। इसलिए सभी राज्यों में पेंशन की रकम और नियम समान नहीं हैं।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.