सावन में अपनाएं आयुर्वेदिक व्रत, शरीर होगा डिटॉक्स, लौटेगी ऊर्जा; जानिए क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज
नई दिल्ली: सावन के महीने में व्रत रखने की परंपरा के साथ यदि आयुर्वेद के सिद्धांतों को भी अपनाया जाए, तो यह शरीर और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, संतुलित और हल्का भोजन लेने से शरीर को आराम मिलता है, पाचन बेहतर होता है और शरीर में जमा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को सहायता मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेदिक व्रत का उद्देश्य केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि व्यक्ति की प्रकृति और स्वास्थ्य के अनुसार संतुलित आहार अपनाना है।
क्या है आयुर्वेदिक व्रत?
आयुर्वेद के अनुसार, स्वस्थ जीवन का आधार केवल भोजन करना नहीं, बल्कि भोजन का सही ढंग से पचना भी है। इसी कारण समय-समय पर हल्का और सुपाच्य आहार लेने या उपवास करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति, आयु और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्रत की पद्धति अपनाने पर जोर दिया जाता है, ताकि पाचन तंत्र को आराम मिल सके और शरीर संतुलित बना रहे।
आयुर्वेदिक व्रत में क्या खा सकते हैं?
आयुर्वेदिक व्रत के दौरान ताजे फल, हरी सब्जियां और हल्के सूप को आहार में शामिल किया जा सकता है। ये पचाने में आसान माने जाते हैं और शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं।
व्रत में साबूदाना, कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़े का आटा और सामक चावल जैसे अनाज का सेवन किया जा सकता है। ये पारंपरिक व्रत आहार का हिस्सा हैं और ऊर्जा देने में सहायक माने जाते हैं।
दूध, दही, छाछ, पनीर, घी और मक्खन का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा भुने हुए मखाने, बादाम, काजू, अखरोट और किशमिश जैसे मेवे भी ऊर्जा के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
पेय पदार्थों में गुनगुना पानी, नींबू पानी, अदरक वाली चाय और जीरा, धनिया तथा सौंफ से बनी हर्बल चाय का सेवन किया जा सकता है। मसालों में सेंधा नमक और सीमित मात्रा में काली मिर्च का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
व्रत के दौरान किन चीजों से बचें?
आयुर्वेद के अनुसार, व्रत के दौरान गेहूं, सामान्य चावल, मैदा, सूजी और बेसन जैसे अनाज से परहेज करना चाहिए।
प्याज और लहसुन को भी व्रत में शामिल नहीं किया जाता। इसके अलावा अधिक मसालेदार, तली-भुनी और भारी भोजन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे पाचन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
बहुत अधिक मीठे खाद्य पदार्थ, पैकेट वाले जूस और शीतल पेय का सेवन भी सीमित रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही शराब और अत्यधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखने की बात कही जाती है।
व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, व्रत के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हल्का, संतुलित और सुपाच्य भोजन लें तथा अत्यधिक तैलीय, अधिक मसालेदार, अत्यधिक खट्टी और अधिक वसा वाली चीजों से बचें। यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, गर्भावस्था है या नियमित दवाएं चल रही हैं, तो लंबे या विशेष प्रकार के उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा।