यरुशलम: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुक्रवार को अहम टेलीफोन वार्ता हुई। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और भविष्य की रणनीतिक चर्चाओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान दोनों नेता जल्द ही अमेरिका में आमने-सामने मुलाकात करने पर भी सहमत हुए हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति ट्रंप को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इजरायल दोनों देशों के मजबूत संबंधों को अत्यंत महत्व देता है।
हालांकि प्रस्तावित मुलाकात की तारीख और स्थान को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
मध्य पूर्व की परिस्थितियों के बीच बढ़ी कूटनीतिक गतिविधियां
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियां तेज हैं। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव, लेबनान की स्थिति और ईरान से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में प्रस्तावित बैठक के दौरान इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
लेबनान मुद्दे पर पहले सामने आ चुके हैं मतभेद
हाल के दिनों में लेबनान में जारी हालात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इजरायली नेतृत्व के कुछ कदमों पर चिंता जताई थी। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय संघर्षों का असर व्यापक कूटनीतिक प्रयासों पर पड़ सकता है, जिसे लेकर वॉशिंगटन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
इसी पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत विशेष महत्व रखती है।
ईरान से जुड़े संवाद में भी बढ़ी हलचल
इस बीच ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों में भी प्रगति की खबरें सामने आई हैं। हाल में दोहा में विभिन्न पक्षों के बीच हुई बैठकों में कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होने की बात कही गई है। संबंधित पक्षों ने भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और अगली बैठक जल्द आयोजित किए जाने की संभावना व्यक्त की गई है।
हिज्बुल्लाह को लेकर इजरायल का सख्त रुख कायम
इजरायल ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि लेबनान के साथ युद्धविराम व्यवस्था लागू होने के बावजूद वह हिज्बुल्लाह को सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानता है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि जब तक संगठन की सैन्य क्षमताओं और हथियारों का मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सुरक्षा संबंधी कार्रवाई जारी रह सकती है।
इजरायल का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए सुरक्षा चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।
अमेरिका-इजरायल संबंधों पर रहेगी नजर
फोन पर हुई बातचीत और संभावित शिखर बैठक को अमेरिका-इजरायल संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात मध्य पूर्व की राजनीति, सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय कूटनीति को नई दिशा दे सकती है।