AI एजेंट्स से 100 से ज्यादा कंपनियों पर साइबर हमला, हैकर ने बिना कोड लिखे ऐसे तोड़े सुरक्षा के घेरे

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वाशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। एक चीनी भाषी हैकर ने स्वचालित एआई एजेंट्स की मदद से दुनिया भर की 100 से अधिक कंपनियों के सिस्टम में सेंध लगा दी। इस हमले की खास बात यह रही कि हैकर ने खुद जटिल कोडिंग करने के बजाय हैकिंग की अधिकांश प्रक्रिया एआई टूल्स के भरोसे छोड़ दी। निशाने पर कृषि उपकरण बनाने वाली डीयर, घरेलू उपकरण निर्माता शार्कनिंजा और इंजन निर्माता कमिन्स जैसी बड़ी कंपनियां भी थीं।

एआई एजेंट्स को सौंपी गई वेबसाइटों में सेंध लगाने की जिम्मेदारी

साइबर सुरक्षा कंपनी नॉरफोर्ज के प्रमुख खतरा अनुसंधानकर्ता स्नोरे फैगरलैंड ने इस गतिविधि पर नजर रखी। उनके मुताबिक, हैकर ने स्वचालित एआई टूल्स को कई घंटों तक स्वतंत्र रूप से काम करने दिया। इन एजेंट्स ने खुद वेबसाइटों की जांच की, सुरक्षा संबंधी कमजोरियां तलाश कीं और उनका फायदा उठाकर सिस्टम तक पहुंच बनाने की कोशिश की।

फैगरलैंड को इस अभियान का पता तब चला, जब वह इंटरनेट पर केयर्न नाम के ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म के खुले इंस्टेंस की जांच कर रहे थे। 2 अक्टूबर के आसपास उन्हें ऐसे करीब दो दर्जन सिस्टम मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध साइबर गतिविधियों में किया जा रहा था।

इन सिस्टम के जरिए उन्हें वास्तविक समय में यह देखने का मौका मिला कि एआई एजेंट्स किस तरह साइबर हमलों को अंजाम दे रहे थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केयर्न से जुड़े आंकड़ों के स्वतंत्र विश्लेषण के जरिए प्रभावित कंपनियों के नामों की पुष्टि की गई।

डीयर, शार्कनिंजा और कमिन्स ने क्या बताया?

हमले की जानकारी सामने आने के बाद प्रभावित कंपनियों ने सुरक्षा संबंधी कदम उठाए। कृषि उपकरण निर्माता डीयर ने बताया कि घटना का पता चलते ही जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई की गई। कंपनी के अनुसार, संवेदनशील जानकारी चोरी होने का कोई संकेत नहीं मिला है।

वहीं, शार्कनिंजा ने कहा कि हमला उसकी एक अलग वेबसाइट पर हुआ था, जहां उत्पादों से संबंधित सहायता की जानकारी उपलब्ध थी। कंपनी ने बताया कि खतरे पर काबू पा लिया गया है।

इंजन निर्माता कमिन्स ने भी अपने एक तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाता द्वारा संचालित वेबसाइट पर संभावित हमले की जांच शुरू करने की जानकारी दी। इसके अलावा, दो छोटे कारोबारियों ने भी अपने सिस्टम में सेंधमारी की बात स्वीकार की।

100 से कम चीनी शब्दों के निर्देश, 1,200 वेबसाइटों को बनाया निशाना

फैगरलैंड के अनुसार, हैकर ने 25 सितंबर से अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान की ई-कॉमर्स वेबसाइटों को निशाना बनाना शुरू किया था। उसने एआई एजेंट्स को 100 से भी कम चीनी शब्दों में संक्षिप्त निर्देश दिए। इसके बाद इन टूल्स ने करीब 1,200 वेबसाइटों में सेंध लगाने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक सफल हमले के दौरान एआई एजेंट्स ने लगभग 23 घंटे तक स्वायत्त रूप से वेबसाइट और उससे जुड़े सिस्टम की जांच की। इस अभियान में डीपसीक और एंथ्रोपिक के क्लॉड कोड जैसे एआई टूल्स के इस्तेमाल के संकेत भी मिले।

पूरे अभियान में करीब 5,000 डॉलर मूल्य के कंप्यूटिंग टोकन खर्च हुए। इस हिसाब से प्रत्येक सफल सेंधमारी की औसत लागत लगभग 50 डॉलर आंकी गई। इससे संकेत मिलता है कि एआई टूल्स के जरिए कम खर्च में बड़े पैमाने पर साइबर हमले करने की क्षमता बढ़ रही है।

मुख्य वेबसाइट पर खामी नहीं मिली तो एआई ने खोजा दूसरा रास्ता

इस अभियान का एक मामला एआई आधारित हमलों की गंभीरता को उजागर करता है। जानकारी के मुताबिक, जब किसी कंपनी के मुख्य पोर्टल पर सुरक्षा की कमजोरी नहीं मिली, तो एआई एजेंट्स ने दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

इस प्रक्रिया में उन्हें एक सार्वजनिक नियंत्रण पैनल मिला। एजेंट्स ने वहां मौजूद कोड की एक छोटी खामी का फायदा उठाया और सर्वर तक नियंत्रण हासिल कर लिया। यह घटना दिखाती है कि स्वचालित एआई टूल्स केवल शुरुआती निर्देशों तक सीमित रहने के बजाय जांच के दौरान दूसरे संभावित रास्ते भी तलाश सकते हैं।

हैकिंग के लिए नहीं बनाया गया था केयर्न प्लेटफॉर्म

केयर्न प्लेटफॉर्म के डेवलपर le1xia0 ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मल्टी-एजेंट प्रणाली हैकिंग के उद्देश्य से तैयार नहीं की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है, तो यह उनके मूल उद्देश्य का हिस्सा नहीं है।

हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने अब यह चुनौती बढ़ रही है कि स्वायत्त एआई एजेंट्स का इस्तेमाल किस तरह सीमित और सुरक्षित रखा जाए। दक्षिण कोरिया, जापान और पश्चिमी देशों में भी ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई है, जिनमें साइबर अपराधियों ने एआई की मदद से बड़ी मात्रा में क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी और कॉरपोरेट सिस्टम तक पहुंच बनाने की कोशिश की।

फैगरलैंड के मुताबिक, साइबर अपराध का यह नया स्वरूप बेहद गंभीर है। अब एक अकेला व्यक्ति भी एआई एजेंट्स की मदद से बड़े पैमाने पर कंपनियों को निशाना बना सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए अपने डिजिटल ढांचे की सुरक्षा मजबूत करना और एआई आधारित हमलों की पहचान करने वाली व्यवस्था विकसित करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

 

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