Airfare Alert: हवाई सफर हो सकता है और महंगा! 10% बढ़ी विमान ईंधन की कीमत, यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ?

0 18

नई दिल्ली: महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को अब हवाई यात्रा के मोर्चे पर भी बड़ा झटका लग सकता है। सरकारी तेल कंपनियों ने 9 जून से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। राजधानी दिल्ली में एटीएफ की कीमत 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 1,15,927 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। विमान ईंधन महंगा होने से एयरलाइनों की परिचालन लागत बढ़ गई है, जिसका असर आने वाले दिनों में हवाई टिकटों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा वैश्विक दबाव

विमान ईंधन की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर रखा है। वैश्विक बाजार में विमान ईंधन की कीमत मार्च 2026 में करीब 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर लगभग 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यानी महज दो महीनों में कीमतों में करीब ढाई गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस तेजी का असर दुनिया भर की एयरलाइनों पर पड़ा है। भारत में भी इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा जैसी एयरलाइनों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे पूरे एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।

एयरलाइनों के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा ATF का

एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में विमान ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 फीसदी होती है। हालांकि वैश्विक बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव के दौरान यह हिस्सा 60 फीसदी तक पहुंच सकता है।

यही वजह है कि एटीएफ की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी एयरलाइनों की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर डालती है। हाल के महीनों में कई एयरलाइनों ने बढ़ती लागत के कारण किराए में बदलाव भी किया है।

सरकार लाई 10,000 करोड़ रुपये की नई योजना

बढ़ती कीमतों के दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण योजना लागू की है। इसके तहत 10,000 करोड़ रुपये का एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया गया है।

इस योजना के तहत सरकारी तेल कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे घरेलू एयरलाइनों को अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर ईंधन उपलब्ध करा सकें। सरकार का कहना है कि इससे एयरलाइनों को वैश्विक तेल कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से कुछ हद तक राहत मिलेगी।

कैसे काम करेगी यह योजना?

सरकार ने एटीएफ के लिए 86.32 रुपये प्रति लीटर का एफओबी बेंचमार्क मूल्य तय किया है। विभिन्न करों, शुल्कों और तेल कंपनियों के मार्जिन को जोड़ने के बाद दिल्ली में इसकी प्रभावी कीमत करीब 115 रुपये प्रति लीटर बैठती है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमत तय बेंचमार्क से ऊपर जाती है तो अंतर की भरपाई सरकार तेल कंपनियों को करेगी। वहीं कीमतें कम होने की स्थिति में अतिरिक्त राशि वापस सरकारी खाते में जमा होगी। योजना में शामिल एयरलाइनों को अधिकतम तीन वर्षों तक अपेक्षाकृत स्थिर दरों पर ईंधन खरीदने की सुविधा मिलेगी।

क्या सस्ते होंगे हवाई टिकट?

एटीएफ स्थिरीकरण योजना की घोषणा के बाद यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे हवाई टिकट सस्ते होंगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य टिकटों की कीमत कम करना नहीं, बल्कि भविष्य में अचानक होने वाली तेज बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। ऐसे में यात्रियों को तत्काल किराए में राहत मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि यदि ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं तो एयरलाइनों को अपने किराया ढांचे को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।

योजना के सामने बड़ी चुनौती भी

विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती इसका स्वैच्छिक होना है। यानी एयरलाइनों पर इसमें शामिल होने की कोई अनिवार्यता नहीं है। यदि कोई बड़ी एयरलाइन इस योजना से बाहर रहती है तो उसे बाजार दर पर ईंधन खरीदना होगा, जिससे उसकी लागत अधिक बनी रह सकती है।

वहीं दूसरी ओर यदि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होती हैं तो योजना से बाहर रहने वाली एयरलाइनों को अधिक लाभ मिल सकता है, जबकि योजना में शामिल कंपनियां तय दरों पर ईंधन खरीदती रहेंगी।

तेल कंपनियों पर भी बढ़ेगा दबाव

जानकारों का मानना है कि सरकारी तेल कंपनियां पहले से ही पेट्रोल, डीजल और एलपीजी से जुड़ी लागत चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में एटीएफ स्थिरीकरण योजना उनके लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी लेकर आई है।

हालांकि 10,000 करोड़ रुपये का फंड शुरुआती राहत जरूर देगा, लेकिन यदि वैश्विक संकट लंबे समय तक बना रहता है तो भविष्य में इस राशि की पर्याप्तता पर भी सवाल उठ सकते हैं। सरकार का दावा है कि इस कदम से देश में हवाई सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी और एविएशन क्षेत्र से जुड़ी करीब 77 लाख नौकरियों को अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा मिलेगी।

अब आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार की दिशा और एयरलाइनों की रणनीति तय करेगी कि यात्रियों को राहत मिलेगी या फिर हवाई सफर और महंगा हो जाएगा।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.