राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन! जांच के लिए पहुंची SIT, गणना कक्ष से शुरू हुई पड़ताल

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अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। टीम ने मंदिर परिसर स्थित गणना कक्ष पहुंचकर रिकॉर्ड खंगालने और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच के शुरुआती चरण में पिछले कुछ वर्षों के दौरान नोटों की गिनती से जुड़े कर्मचारियों का ब्यौरा, उनके नाम-पते और ट्रस्ट से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इन तथ्यों के आधार पर आगे पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कर्मचारियों और व्यवस्थाओं की होगी गहन जांच

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों की पृष्ठभूमि का भी परीक्षण करेगी। इस दौरान उनकी आर्थिक स्थिति में आए बदलावों की समीक्षा किए जाने की संभावना है। साथ ही कर्मचारियों के बीच संभावित पारिवारिक या अन्य संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। शासन की ओर से एसआईटी में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

योगी सरकार ने गठित की थी तीन सदस्यीय एसआईटी

राज्य सरकार ने शनिवार को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम की अगुवाई लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। इसके अलावा आईजी लखनऊ रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को सदस्य बनाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री से एसआईटी गठन का अनुरोध किया था।

जांच का दायरा कितना बढ़ेगा, इस पर टिकी नजरें

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जांच केवल चढ़ावे की राशि में कथित करोड़ों रुपये की गड़बड़ी, गणना प्रक्रिया और उससे जुड़े जवाबदेह व्यक्तियों तक सीमित रहेगी या इसका दायरा और व्यापक किया जाएगा। यदि जांच आगे बढ़ती है तो कई महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों तक भी इसकी आंच पहुंच सकती है।

बताया जा रहा है कि मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर उठे सवाल भी जांच के दौरान चर्चा का विषय बन सकते हैं। ऐसे में जांच की दिशा और दायरा आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।

धन उगाही और व्यवस्थाओं को लेकर भी उठते रहे सवाल

सूत्रों के मुताबिक मंदिर परिसर की कुछ व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। दर्शन व्यवस्था को लेकर नि:शुल्क प्रणाली होने के बावजूद धन उगाही के आरोप लगते रहे हैं। इन शिकायतों के संबंध में कुछ लोगों पर कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया।

इसके अलावा सुरक्षा कारणों से फोटोग्राफी पर प्रतिबंध होने के बावजूद सोशल मीडिया पर तस्वीरों के प्रसार को लेकर भी जवाबदेही तय किए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है।

जांच शुरू होते ही बढ़ी जिम्मेदार पदाधिकारियों की चिंता

एसआईटी की सक्रियता के बाद मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न पदाधिकारियों के बीच भी हलचल बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि कई लोगों को आशंका है कि यदि जांच का दायरा विस्तारित हुआ तो विभिन्न स्तरों पर जवाबदेही तय की जा सकती है।

वहीं ट्रस्ट के कुछ कर्मचारी जांच प्रक्रिया को सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार निर्धारित कार्यप्रणाली के बावजूद अंतिम समय में बाहरी हस्तक्षेप होने से व्यवस्थाओं पर असर पड़ता है और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

वेतन और आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी कर्मचारियों ने उठाए सवाल

कुछ कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कंपनियों को अपेक्षाकृत अधिक भुगतान किया जा रहा है, जबकि लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग पूरी नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि संसाधनों और धन के उपयोग को लेकर भी पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।

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