बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास नहीं, माता-पिता का वक्त चाहिए! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- खुद सिखाइए अच्छे संस्कार
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की परवरिश को लेकर माता-पिता को अहम सलाह दी है। बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को हर गतिविधि के लिए संगीत, ताइक्वांडो या दूसरी एक्स्ट्रा क्लास में भेजने के बजाय माता-पिता खुद उनके साथ समय बिताएं और उन्हें जरूरी बातें सिखाएं।
माता-पिता बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास में क्यों भेज रहे?
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि माता-पिता बच्चों को प्रतियोगिता में आगे रखने के लिए स्कूल के बाद इतनी सारी गतिविधियों में क्यों शामिल कराते हैं। अदालत ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के नाम पर उन्हें लगातार अलग-अलग एक्स्ट्रा क्लास में भेजना जरूरी नहीं है।
कोर्ट ने माता-पिता से कहा कि वे बच्चों को खुद सिखाने और उनके साथ बातचीत करने के लिए समय निकालें। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच संबंध मजबूत होंगे और बच्चों के व्यक्तित्व के विकास में भी मदद मिलेगी।
लड़कों को महिलाओं के सम्मान की सीख दें
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और उन्हें अच्छे संस्कार तथा तौर-तरीके सिखाने चाहिए। उन्होंने खास तौर पर लड़कों की परवरिश पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही लड़कियों और महिलाओं के साथ उचित व्यवहार करना सिखाया जाना चाहिए।
क्या था मामला?
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला बच्चों की कस्टडी से जुड़ा था। सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि बच्चों को संगीत, ताइक्वांडो और दूसरी एक्स्ट्रा क्लास में भेजना आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए उनके सर्वांगीण विकास में मदद करता है।
इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि बच्चों के लिए बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा क्लास भी जरूरी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों से बात करनी चाहिए, क्योंकि इससे वे बेहतर तरीके से विकसित होंगे। अदालत ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चों को हर चीज सीखने के लिए अलग-अलग कक्षाओं में भेजने के बजाय वे खुद उनके साथ समय बिताएं और उन्हें जरूरी संस्कार व व्यवहार सिखाएं।