CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत, अभिजीत दिपके का पहला रिएक्शन; केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली: सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि उनकी गलती क्या है, क्या जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना अपराध है? इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाने की बात कही। बताया गया कि इन दिनों अभिजीत दिपके अपनी दादी के निधन के कारण महाराष्ट्र स्थित अपने गांव में हैं।
इंडिया ब्लॉक पर भी रखी अपनी बात
मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने इंडिया ब्लॉक को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सभी का उद्देश्य एक ही है और वे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, जिन पर उन्होंने चुनावों में धांधली कर नरेंद्र मोदी को सत्ता में बनाए रखने में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप है और आगे भी स्वतंत्र रूप से काम करती रहेगी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पार्टी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ है। उनके मुताबिक दोनों का आंदोलन एक समान उद्देश्य के लिए है।
जंतर-मंतर पर नारेबाजी के दौरान हुई गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया था। आरोप है कि सीजेपी के ये नेता अपने समर्थकों के साथ निषेध क्षेत्र में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में उन्हें प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया। बाद में सौरव दास और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे से 5 हजार रुपये का बेल बॉन्ड भरवाया गया, जिसमें एक वर्ष तक अशांति नहीं फैलाने की शर्त रखी गई।
पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं सीजेपी नेता
इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान आशुतोष रांका, सौरव दास और अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। उस समय तीनों को एक वर्ष तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया था। रिहाई के बाद 13 अक्टूबर को वे फिर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में पहुंचकर प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगे। इसी के बाद पुलिस ने दोबारा कार्रवाई की।
जंतर-मंतर अब प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं
हाल ही में जंतर-मंतर को दिल्ली में अधिसूचित धरना स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। अब वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। सरकार ने धरना-प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को निर्धारित स्थल बनाया है। ऐसे में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर कार्रवाई की गई।
एसआईआर और सीईसी के खिलाफ जारी है विरोध प्रदर्शन
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर सीजेपी और अन्य संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। इसी क्रम में 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने आदेश जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल घोषित किया था। इसके बाद जंतर-मंतर को अधिसूचित धरना स्थलों की सूची से हटा दिया गया। सीजेपी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शन स्थलों को राजधानी के राजनीतिक केंद्र से दूर ले जाने से विरोध की आवाज कमजोर होगी।