संसद में लगातार हंगामे से विपक्ष को ही नुकसान? कांग्रेस के शशि थरूर ने उठाए सवाल, बोले- बहस के लिए सदन चलना जरूरी

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नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के चौथे सप्ताह की शुरुआत भी पिछले तीन सप्ताह की तरह हंगामे के साथ हुई। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब सदन की कार्यवाही बिना व्यवधान के चली हो। सोमवार को लोकसभा में लगातार 16वें दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका। इस बीच संसद में लगातार हो रहे हंगामे को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं।

संसद में हंगामे से विपक्ष को नुकसान का सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष पूरे सत्र इसी तरह सदन की कार्यवाही बाधित करता रहा तो इसका राजनीतिक नुकसान उसे ही उठाना पड़ सकता है। संसद में चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से रखे गए तर्क जनता तक अलग संदेश पहुंचाते हैं। लगातार हंगामे की स्थिति में यह धारणा भी बन सकती है कि विपक्ष सदन के भीतर अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने में सक्षम नहीं है।

सरकार को लोकसभा में बहुमत का लाभ मिल रहा है और इसी के चलते कई विधेयक पारित किए जा चुके हैं। ऐसे में विपक्ष के लिए सदन में चर्चा और बहस के जरिए अपनी स्थिति मजबूती से रखने की जरूरत और बढ़ जाती है।

सोमवार को लगातार हंगामे के चलते नहीं चला प्रश्नकाल

सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान और चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे।

पीठासीन सभापति और आरएसपी नेता एनके प्रेमचंद्रन ने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। करीब एक मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो पीठासीन सभापति संध्या राय ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। उन्होंने सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसके बाद कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। दिन में तीन बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

अमित शाह के बयान तक गतिरोध जारी रखने का ऐलान

संसद सत्र के चौथे सप्ताह की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विपक्ष की रणनीति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा था कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान नहीं देंगे, तब तक गतिरोध जारी रहेगा।

शशि थरूर ने संसद में बहस और चर्चा पर दिया जोर

कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टु यूनाइटेड नेशन्स के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और धरना देने के लिए अलग-अलग स्थान हैं, जबकि संसद का उद्देश्य अलग है।

शशि थरूर के मुताबिक, यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो संसद में उस पर सवाल किया जाना चाहिए और तर्क के साथ अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि वह वैधानिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन सके। उन्होंने कहा कि बहुमत वाली सरकार विपक्ष के समर्थन के बिना भी विधेयक पारित कर सकती है, ऐसे में विपक्ष को कम से कम प्रश्नकाल के दौरान अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।

उन्होंने विधेयकों पर बहस की जरूरत पर भी जोर दिया। शशि थरूर ने कहा कि संसद का सुचारु रूप से चलना केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए भी जरूरी है।

 

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