E20 पेट्रोल से आगे बढ़ेगी सरकार की तैयारी, 20% से ज्यादा एथनॉल मिलाने की योजना; फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर जोर
नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिश्रण वाली मौजूदा E20 व्यवस्था के बाद सरकार अब इससे आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथनॉल मिलाने की अनुमति देने पर काम कर रही है। हालांकि, अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के जरिए किए जाने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।
E20 के बाद अब ज्यादा एथनॉल पर फोकस
एक कार्यक्रम में तरुण कपूर ने कहा कि E20 कार्यक्रम अब तक काफी सफल रहा है और कई वाहन कंपनियां जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेश करने की योजना की घोषणा कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार का ध्यान ऐसे वाहनों पर है, जो E20 से अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकें।
कपूर के मुताबिक, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की पेशकश के साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी होगा। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जैव-ईंधन पर जोर देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
उनके अनुसार, संकट के कारण आपूर्ति में रुकावट आई है और कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। आने वाले समय में इसके और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में देश में उपलब्ध संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत है।
E20 में 80% पेट्रोल और 20% एथनॉल
मौजूदा E20 ईंधन में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जाता है। सरकार अब इस सीमा से आगे जाकर एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है।
हालांकि, तरुण कपूर ने स्पष्ट किया कि अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल सामान्य पेट्रोल वाहनों के बजाय फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे वाहन पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में एथनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
एथनॉल उत्पादन क्षमता जरूरत से ज्यादा हुई
तरुण कपूर ने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता अब पेट्रोल में इसके मौजूदा मिश्रण की जरूरत से अधिक हो गई है। ऐसे में अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के दूसरे उपयोगों की संभावनाओं पर भी विचार करना होगा।
इसका मकसद एथनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना और जैव-ईंधन के दूसरे क्षेत्रों में इसकी खपत बढ़ाना है।
डीजल के लिए भी जैव-ईंधन पर काम
सरकार की योजना केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं है। डीजल के क्षेत्र में भी जैव-ईंधन एडिटिव्स के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। कपूर ने बताया कि आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोगों के सफल रहने पर जैव-ईंधन के लिए एक नया रास्ता खुल सकता है।
उन्होंने बताया कि यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है।
गोवर्धन योजना से CBG को बढ़ावा देने की तैयारी
तरुण कपूर ने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी उल्लेख किया। यह योजना संपीड़ित बायोगैस यानी CBG को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाली मदद को एक साथ लाने पर केंद्रित है।
हालांकि, इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है। सरकार जैव-ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए इन प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।