खेत बचाओ अभियान को मिली नई ताकत! प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान, किसानों को बताए गए कम लागत में ज्यादा लाभ के तरीके

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गौतमबुद्धनगर: भारत सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी “खेत बचाओ अभियान” के तहत गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र छौलस, दादरी में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय कृषक कार्यशाला का आयोजन किया गया। 1 जून से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है।

कार्यशाला में दादरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक तेजपाल नागर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि आईसीएआर की गवर्निंग बोर्ड समिति की सदस्य सुषमा सिंह ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों और बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों ने भाग लिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक तेजपाल नागर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और खेती की लागत भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर स्वस्थ और समृद्ध कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

वैज्ञानिकों ने बताए प्राकृतिक खेती के फायदे

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती की अवधारणा, इसके मूल सिद्धांतों और आधुनिक कृषि परिदृश्य में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सुषमा सिंह ने किसानों को किया प्रेरित

आईसीएआर की गवर्निंग बोर्ड समिति की सदस्य सुषमा सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की तकनीक नहीं, बल्कि कृषि और पर्यावरण संरक्षण का समग्र दृष्टिकोण है। उन्होंने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, प्राकृतिक कीटनाशकों तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार कृषि उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षण और प्रदर्शन गतिविधियां प्रमुख रूप से संचालित की जा रही हैं।

व्यावहारिक प्रदर्शन के जरिए समझाई गई तकनीकें

कार्यशाला के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने बीज उपचार, जीवामृत निर्माण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जैविक अपशिष्टों के उपयोग और प्राकृतिक कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। किसानों को प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों और प्रेरणादायक अनुभवों की भी जानकारी दी गई।

किसानों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए समाधान

कार्यक्रम में किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न प्रश्न विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका वैज्ञानिक आधार पर समाधान प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कई किसानों ने अपने गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प भी लिया।

उप कृषि निदेशक ने बताया महत्वपूर्ण कदम

समापन अवसर पर उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्यशाला किसानों में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की।

 

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