धनतेरस से भाई दूज तक कब मनाए जाएंगे पांच बड़े त्योहार? 6 से 11 नवंबर तक जानें पूजा के शुभ मुहूर्त और खास मान्यताएं

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लखनऊ: दीपावली के पांच प्रमुख पर्वों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा बेहद खास रहने वाला है। धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिनों के इन त्योहारों को यम पंचक के नाम से जाना जाता है। इस दौरान भगवान धन्वंतरि, यमराज, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। इस साल ये प्रमुख पर्व 6 से 11 नवंबर के बीच मनाए जाएंगे। धनतेरस पर यम दीप जलाने से लेकर दीपावली पर लक्ष्मी पूजन और भाई दूज पर बहन के घर जाने तक, हर पर्व की अपनी धार्मिक मान्यता और परंपरा है। आइए जानते हैं पांचों त्योहारों की तारीख, महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्त।

1. धनतेरस: 6 नवंबर को जलाएं यम दीप

दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धन, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि और पंचांग की गणना के अनुसार धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

इस दिन आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही यमराज के निमित्त घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है। इस दीपक को यम दीप कहा जाता है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। इस दिन सोना-चांदी, सिक्के और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • शुभ चौघड़िया: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक
  • चर चौघड़िया: शाम 4:00 बजे से 5:23 बजे तक
  • लाभ चौघड़िया: रात 8:37 बजे से 10:15 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: रात 11:52 बजे से अगले दिन 1:29 बजे तक

2. नरक चतुर्दशी: 8 नवंबर को करें अभ्यंग स्नान

नरक चतुर्दशी को नरका चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इसे हनुमान जयंती के रूप में मनाने की भी परंपरा है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 8 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन दीपावली का मुख्य पर्व भी पड़ेगा।

हालांकि, मां काली, हनुमान जी और यमदेव की पूजा करने वाले श्रद्धालु 7 नवंबर को छोटी दिवाली की परंपरा निभाएंगे। इस दिन शाम को चार बातियों वाला पुराना दीपक घर के बाहर जलाने की मान्यता है।

नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्नान से शरीर और मन की शुद्धि होती है।

अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त: 8 नवंबर रविवार को सुबह 5:20 बजे से 6:22 बजे तक।

3. दीपावली: 8 नवंबर को प्रदोष काल में करें लक्ष्मी पूजन

दीपावली सनातन धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं। इसी कारण लोग घरों की साफ-सफाई और सजावट कर शाम को दीपक जलाते हैं। पूजा के समय घर के द्वार खुले रखने की भी परंपरा है।

व्यापारियों के लिए भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन बहीखातों, कलम और तराजू की पूजा की जाती है। इसके अलावा पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें धूप और भोग अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर सोमवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। 9 नवंबर को प्रदोष काल में प्रतिपदा तिथि लगने के कारण दीपावली का पर्व 8 नवंबर को ही मनाया जाएगा। वहीं 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या के अवसर पर स्नान और दान का महत्व रहेगा।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त

  • प्रदोष काल: शाम 5:13 बजे से 7:49 बजे तक
  • वृषभ काल यानी स्थिर लग्न: शाम 5:37 बजे से 7:34 बजे तक
  • निशीथ काल: रात 11:17 बजे से 12:09 बजे तक

4. गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर को मनाया जाएगा अन्नकूट पर्व

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की परंपरा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व में गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। इस घटना की याद में गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसी परंपरा के कारण इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है।

इस साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 नवंबर मंगलवार को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर मंगलवार को की जाएगी।

5. भाई दूज: 11 नवंबर को बहन के घर जाएं भाई

दीपोत्सव का समापन भाई दूज के पर्व के साथ होता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 11 नवंबर बुधवार को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर भाई दूज का पर्व 11 नवंबर को मनाया जाएगा।

भाई दूज का शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:58 बजे से 3:09 बजे तक।

इस दिन भाई को अपनी विवाहित बहन के घर जाकर उसके हाथों से बना भोजन करने और सामर्थ्य के अनुसार उपहार देने की परंपरा है। बहन को धन, वस्त्र और मिठाई भेंट की जा सकती है। यदि बहन छोटी और अविवाहित है तो उसकी पसंद के अनुसार उपहार दिया जाता है। इसी दिन कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी करते हैं। स्कंद पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी भाई दूज के महत्व का उल्लेख मिलता है।

 

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