यूपी में निवेशकों का भरोसा बढ़ा तो रक्षा उद्योग को भी मिला नया आधार? नंदी बोले- उद्योग लगने तक सरकार करेगी हैंडहोल्डिंग

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ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रदेश ने निवेशकों के बीच संवाद, सुविधा और लगातार सहयोग के जरिए अपना भरोसा बनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिसमें निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उद्योग स्थापित होने तक जरूरी सहयोग और हैंडहोल्डिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी।

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए नंदी ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों और प्रमुख शहरों में आयोजित रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद से उत्तर प्रदेश के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो में विभिन्न देशों की भागीदारी भी इसी बढ़ते संवाद और विश्वास को दर्शाती है।

डिफेंस कॉरिडोर में 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव

नंदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में अब तक करीब 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दे रही है, जिसमें निवेशकों को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रदेश में आने के बाद निवेशक की जरूरतों को समझते हुए संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान उपलब्ध कराया जाए।

‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’

नंदी ने कहा कि निवेशक के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उसे नीतियों, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, परीक्षण सुविधाओं, तकनीकी जरूरतों और जरूरी अनुमतियों से जुड़े मामलों में भी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निवेशक सुविधा को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए कार्यालय की कार्यप्रणाली और व्यवहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए भी अवसर

मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र केवल टैंक, मिसाइल या विमान निर्माण तक सीमित नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स समेत पूरी सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में रक्षा विनिर्माण का इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इससे बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और तकनीकी कंपनियों के लिए भी रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के अवसर बन सकते हैं।

कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसे को बताया निवेश का आधार

नंदी ने कहा कि निवेश के लिए कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा महत्वपूर्ण हैं। बेहतर एक्सप्रेसवे और परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी तथा औद्योगिक आधारभूत ढांचे से प्रदेश में कारोबार के अवसर बढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने और अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करने की दिशा में काम कर रही है। उद्योग और सरकार के बीच संबंध सहयोग और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए।

नंदी ने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन रही हैं। सरकार निवेशकों के साथ कदम-दर-कदम खड़ी है और प्रयास है कि उनका निवेश सुरक्षित वातावरण में उत्पादन, रोजगार तथा तकनीकी क्षमता के विस्तार से जुड़ सके।

रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर: कर्नल संजय सिंह

यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स समेत विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग रक्षा सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह केवल अनुमान पर आधारित नहीं होती, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं से जुड़ी होती है। ऐसे में स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की संभावनाएं मौजूद हैं।

कर्नल संजय सिंह ने उद्योगों से अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किन जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, परीक्षण सुविधाओं, अनुसंधान एवं विकास तथा निवेशक सुविधा के साथ ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें।

 

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