2 महीने बाद खुला होर्मुज का रास्ता! US-ईरान समझौते के बाद समुद्र में लौटे तेल टैंकर, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। करीब दो महीने तक चली समुद्री नाकाबंदी समाप्त होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से ईरानी कच्चे तेल का निर्यात फिर शुरू हो गया है। समुद्री मार्ग खुलने के साथ ही तेल से लदे टैंकरों की आवाजाही तेज हो गई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
दो सुपरटैंकरों ने शुरू किया तेल निर्यात
टैंकर ट्रैकिंग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी के दो विशाल वीएलसीसी सुपरटैंकर डियोना और हीरो-2 भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर रवाना हुए हैं। इन दोनों जहाजों में कुल 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ बताया गया है।
जानकारी के मुताबिक, ये टैंकर उस समुद्री क्षेत्र से बाहर निकल चुके हैं जहां अमेरिकी नौसेना की निगरानी और नाकाबंदी लागू थी। पिछले दो महीनों में यह पहला ऐसा निर्यात माना जा रहा है, जिसकी पुष्टि जहाजों की ट्रैकिंग प्रणाली और उपग्रह तस्वीरों के आधार पर हुई है।
तीसरा टैंकर भी एक मिलियन बैरल तेल लेकर निकला
रिपोर्ट के अनुसार, दो सुपरटैंकरों के बाद एक स्वेजमैक्स श्रेणी का टैंकर भी करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान धीरे-धीरे अपने तेल निर्यात को सामान्य स्तर पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पाकिस्तान की दिशा में बढ़ता दिखा एक और जहाज
समुद्री निगरानी मानचित्रों में एक अन्य ईरानी टैंकर ‘स्ट्रीम’ भी नजर आया है, जो अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास से आगे बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह जहाज पिछले सात सप्ताह से समुद्री क्षेत्र में प्रतीक्षा कर रहा था और अब नाकाबंदी हटने के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहा है।
शांति समझौते का असर, तेल बाजार में आई नरमी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समुद्री व्यापार बहाल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में दबाव कम हुआ है। लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने वाले कच्चे तेल के दामों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलकर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। इसके अलावा मर्बन क्रूड की कीमतों में भी 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
महंगाई पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है और भू-राजनीतिक तनाव दोबारा नहीं बढ़ता, तो वैश्विक बाजार में ऊर्जा लागत कम रह सकती है। इसका असर परिवहन, ईंधन और अन्य क्षेत्रों की लागत पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दबाव कम होने की संभावना बढ़ेगी।
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव या नाकाबंदी सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित करती है।