खरीफ फसलों पर कीट-रोग का बढ़ा खतरा! किसानों के लिए कृषि विभाग की बड़ी एडवाइजरी, समय रहते करें ये जरूरी उपाय

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गौतमबुद्धनगर: मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच खरीफ फसलों पर कीट और रोगों का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दूबे ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि समय पर वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

धान की फसल में खरपतवार और कीट नियंत्रण पर विशेष जोर

कृषि विभाग के अनुसार धान की रोपाई और सीधी बुवाई की स्थिति के अनुसार अलग-अलग खरपतवारनाशी दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी गई है। रोपाई वाली फसल में पेनोक्ससुलम, बिसपाईरीबेक सोडियम, ब्युटाक्लोर और प्रेटीलाक्लोर के उपयोग की संस्तुति की गई है, जबकि सीधी बुवाई वाले खेतों में बेन्सल्फ्युरान मिथाइल और ऑक्सीफ्लोरफेन के प्रयोग की सलाह दी गई है।

तना बेधक और पत्ती लपेटक से बचाव के लिए निगरानी जरूरी

धान में तना बेधक और पत्ती लपेटक की रोकथाम के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर ट्राईकोग्रामा जापोनिकम या ट्राईकोग्रामा किलोनिस का प्रयोग करने के साथ ही बाईफेनथ्रिन, क्लोरेनट्रानिलीप्रोल या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड जैसी अनुशंसित दवाओं के उपयोग की भी सलाह दी गई है।

फुदका और जीवाणु झुलसा रोग से बचाव के उपाय

दुग्धावस्था में धान की फसल पर हरे, भूरे और सफेद पीठ वाले फुदकों का प्रकोप बढ़ सकता है। इसके नियंत्रण के लिए बेंजीपायरीमोक्सान अथवा एजाडिरेक्टिन आधारित दवाओं के छिड़काव की सलाह दी गई है। वहीं जीवाणु झुलसा और जीवाणुधारी रोग की रोकथाम के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट, टेट्रासाइक्लिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के मिश्रण का प्रयोग करने की संस्तुति की गई है।

मक्का में फॉल आर्मी वर्म और तना बेधक पर रखें नजर

मक्का की फसल में तना बेधक का आर्थिक क्षति स्तर 10 प्रतिशत मृत गोभ दिखाई देने पर नोवालुरोन और इमामेक्टिन बेंजोएट के मिश्रण का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। फॉल आर्मी वर्म की रोकथाम के लिए पक्षी आश्रय, प्रकाश प्रपंच और फेरोमोन ट्रैप लगाने के साथ ही आवश्यकता अनुसार ब्रोफ्लोनिलाइड या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल का प्रयोग करने को कहा गया है।

मूंगफली में बीज और भूमि शोधन पर दें विशेष ध्यान

मूंगफली की बुवाई से पहले बीजों का थिरम और कार्बेन्डाजिम अथवा ट्राईकोडर्मा से उपचार करने की सलाह दी गई है। भूमि जनित रोगों और कीटों की रोकथाम के लिए ट्राईकोडर्मा और ब्युवेरिया बेसियाना को गोबर की खाद के साथ मिलाकर खेत में डालने की संस्तुति की गई है। टिक्का रोग की रोकथाम के लिए बिटरटेनोल या हेक्साकोनाजोल के छिड़काव की सलाह भी जारी की गई है।

अरहर, उड़द और मूंग में अपनाएं बीज उपचार की तकनीक

दलहनी फसलों को मृदा जनित रोगों और दीमक, सफेद गिडार, कटवर्म तथा जड़ की सुंडी जैसे कीटों से बचाने के लिए ट्राईकोडर्मा और ब्युवेरिया बेसियाना का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। अरहर सहित अन्य दलहनी फसलों के बीजों को बुवाई से पहले ट्राईकोडर्मा से उपचारित करने की भी संस्तुति की गई है।

सब्जी फसलों के लिए भी जारी हुई सलाह

बैंगन की फसल में फल एवं तना बेधक के नियंत्रण के लिए ब्रोफ्लोनिलाइड के प्रयोग की सलाह दी गई है। वहीं मिर्च की फसल में थ्रिप्स और फल बेधक की रोकथाम के लिए सायंट्रानिलीपोल अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट के छिड़काव की अनुशंसा की गई है।

किसानों से समय पर प्रबंधन अपनाने की अपील

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे कृषि विभाग की एडवाइजरी का पालन करते हुए समय पर कीट एवं रोग प्रबंधन करें। इससे फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा और बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त होगा।

 

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