अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भारत को मिल सकती है बड़ी राहत! सस्ते तेल की उम्मीद बढ़ी, अगले हफ्ते दिल्ली पहुंचेंगे ईरानी पेट्रोलियम मंत्री

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति का रास्ता दोबारा खुलने की उम्मीद मजबूत हुई है। इसी बीच ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद अगले सप्ताह नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को फिर से गति मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान से तेल आपूर्ति सामान्य होती है, तो भारत को ऊर्जा लागत कम करने और आयात बिल घटाने में बड़ा लाभ मिल सकता है।

ब्रिक्स बैठक में शामिल होंगे ईरानी मंत्री

22 और 23 जून को भारत की मेजबानी में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक आयोजित होने जा रही है। 11 सदस्यीय समूह की इस अहम बैठक में ईरान का प्रतिनिधित्व पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद करेंगे।

बैठक में कई रणनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं पर भी नजर रहेगी।

अमेरिका-ईरान समझौते ने बढ़ाई उम्मीदें

ईरानी मंत्री का यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती समझौते के बाद हो रहा है। इस समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते के तहत ईरान के कच्चे तेल निर्यात और उससे जुड़ी कुछ सेवाओं पर लागू प्रतिबंधों में आंशिक ढील दी गई है, जबकि अन्य मुद्दों पर बातचीत जारी है।

इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई संभावनाओं को जन्म दिया है और तेल आयातक देशों की उम्मीदें बढ़ाई हैं।

भारत के लिए फिर अहम साझेदार बन सकता है ईरान

ईरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रतिबंधों में राहत मिलने पर भारत के साथ पुरानी ऊर्जा साझेदारी को फिर से मजबूत किया जा सकता है। प्रतिबंध लागू होने से पहले ईरान भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था।

ईरानी पक्ष का मानना है कि यदि बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार एक बार फिर तेजी पकड़ सकता है। इससे द्विपक्षीय व्यापार को भी नई गति मिलने की संभावना है।

भारत ने समझौते का किया स्वागत

भारत ने अमेरिका-ईरान समझौते को सकारात्मक संकेत बताते हुए क्षेत्रीय शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है। सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए लाभकारी होगी।

हाल के दिनों में भारतीय नेतृत्व ने भी क्षेत्र में शांति और कूटनीतिक समाधान के प्रयासों का समर्थन किया है।

तेल कीमतों में नरमी से अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में कमी और आपूर्ति के नए स्रोत खुलना देश के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान से तेल आयात दोबारा शुरू होता है और वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे भारत का आयात खर्च घटेगा, महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।

रूस अब भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

वर्तमान में भारत के लिए रूस कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और अन्य देशों से भी बड़ी मात्रा में तेल आयात किया जा रहा है। हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की वापसी से भारत के पास खरीद के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे बेहतर कीमतों पर सौदे संभव हो सकेंगे।

 

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