हार के बाद TMC में बढ़ी अंदरूनी हलचल, शिवसेना जैसे हालात की चर्चा तेज; क्या ममता बनर्जी संभाल पाएंगी संगठन?
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लगातार उठापटक देखने को मिल रही है। पार्टी में नेताओं के इस्तीफों और असंतोष की बढ़ती घटनाओं ने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या टीएमसी का हाल महाराष्ट्र की शिवसेना जैसी टूट की ओर बढ़ सकता है।
लगातार इस्तीफों से बढ़ी टीएमसी की चिंता
चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पार्षदों से लेकर सांसदों और वरिष्ठ नेताओं तक के इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई नेताओं द्वारा पार्टी संगठन और नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे अंदरूनी कलह और गहरी होती दिख रही है।
बीजेपी के दावे से बढ़ी सियासी सरगर्मी
इस बीच बीजेपी नेताओं की ओर से यह दावा भी किया गया है कि टीएमसी में बड़ी टूट हो सकती है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने कहा था कि पार्टी के कई विधायक और सांसद असंतोष में हैं और भविष्य में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि टीएमसी ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति और इस्तीफे
हाल ही में टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पार्टी के कई पदों से इस्तीफा दिया है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अभी पार्टी नहीं छोड़ रही हैं। वहीं, प्रवक्ता शांतनु सेन ने भी पद छोड़ते हुए पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इन घटनाओं ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है।
अभिषेक बनर्जी पर जांच और बढ़ता दबाव
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और जांच एजेंसियों की सक्रियता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं पर चल रही जांच और आरोप-प्रत्यारोप के बीच संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे कई नेताओं के रुख बदलने की आशंका जताई जा रही है।
ममता बनर्जी के सामने बड़ी संगठनात्मक चुनौती
चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रखने की है। लगातार इस्तीफे और असंतोष के बीच टीएमसी की आंतरिक स्थिति को लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या ममता बनर्जी पार्टी को मजबूत कर पाएंगी या हालात और बिगड़ सकते हैं।